मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर क्रोध सहनशील और महान व्यक्तियों के पास कुछ समय के लिए ही टिक पाता है क्योंकि सहनशील व महान व्यक्तित्व वाले लोग ही अपने क्रोध को प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकते हैं और उसे हावी नहीं होने देते, जबकि आमतौर पर क्रोध व्यक्ति के विवेक और निर्णय क्षमता को नष्ट कर देता है, जिससे वह आवेगपूर्ण और विनाशकारी कार्य करता है, जबकि सहनशील व महान व्यक्ति क्रोध को एक संदेश के रूप में देखते हैं, ना कि एक स्थायी अवस्था के रूप में, और ऐसे लोग उसे शांत व व्यवस्थित तरीके से हल करने का प्रयास करते हैं। अनावश्यक क्रोध करने वाले लोग अपने जीवन को तो अशांत करते ही हैं, दूसरों की शांति भी नष्ट कर देते हैं । यह स्थिति दुख का कारण बनती है और इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर भी कर देती है ।
इंसान का जीवन प्रतिक्रियाओं से भरा होता है। जब किसी परिस्थिति में हमारी इच्छा पूरी नहीं होती या हमारे अहंकार कोे ठेस पहंचाती है, तब वह प्रतिक्रिया क्रोध का रूप ले लेती है। यह क्रोध कभी-कभी इतना तीव्र हो जाता है कि इंसान अपना संतुलन खो बैठता है और ऐसे कार्य कर देता है जिसका परिणाम भयंकर होता है । क्रोध में इंसान अपनी बुद्धि को खो देता है, सही-गलत का भेद नहीं कर पाता और गंभीर अपराध तक कर बैठता है । इसलिए यदि हम अपने जीवन में सच्ची सफलता और विकास चाहते हैं, घर में सुख शांति चाहते हैं तो क्रोध पर हमें नियंत्रण करना ही होगा क्योंकि क्रोध का नियंत्रण ही हमें जीवन में सुख शांति का ऐसा पैगाम देता है, जहां शांति, प्रेम और सद्भाव का वातावरण होता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

