सह संपादक हिमांचल प्रदेश | आपदा प्रभावित नेरघरवासड़ा व कुण्डुनी गांवों के किसान परिवारों ने बैठक आयोजित कर हिमाचल किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में 26 सितंबर को एसडीएम के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने का निर्णय लिया।
प्रभावित किसान परिवारों के विशेष आमंत्रण पर हिमाचल किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद सदस्य कुशल भारद्वाज ने नेर में आयोजित बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं और मूलभूत मुद्दों को चिन्हित किया।
इस अवसर पर शेर सिंह, मस्त राम, गुलाब सिंह, पवन ठाकुर, सुमन कपूर, सैना देवी, चमन लाल, निर्मला देवी,सुरेश कुमार, निखिल तथा अन्य प्रभावितों ने अपने विचार रखे। बैठक में कुशाल भारद्वाज ने कहा कि इस आपदा में 69 से भी ज्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं। यदि स्थिति और बिगड़ी, तो छपरोट में बनी तलाई भी ढह सकती है, जिससे पूरी पहाड़ी खिसकने से नेर खड्ड में प्राकृतिक डैम बन सकता है। यदि ऐसा हुआ तो जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए प्रभावितों को जबरन वापस भेजने के बजाए प्रशासन को चाहिए कि केंद्रीय भू गर्भ विभाग और राज्य के भू गर्भ विभाग से सर्वे करवाया जाए कि पहाड़ी के खिसकने का कितना खतरा है। क्योंकि लोगों ने अपने मकान खाली कर दिए हैं और जो मकान ढहने से बच गए हैं, उनमें वापस जाना मुनासिब नहीं है। अतः सभी खतरे वाले मकानों को पूर्णतः क्षतिग्रस्त करार देकर सभी मकानों का प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹7 लाख का मकान मुआवजा, चाहे मकान मलकियत भूमि पर हो या नहीं। तबाह हुए सामान को रोजनामचे में दर्ज कर हर तरह के नुकसान, गौशाला व मृत गाय का भी लिए अलग से मुआवजा दिया जाए। रिहाइश शिफ्ट करने तथा घास चारे के अभाव में जो लोग अपने पशुओं को मुफ्त में दूसरों को देने के लिए मजबूर हुए, उन्हें भी मुआवजा मिलना चाहिए। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि प्रभावितों को जमीन के बदले जमीन और मकान के बदले मकान दिए जाएं। नए मकानों के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत की जाए और काऊशेड के लिए मनरेगा से ₹1 लाख रु. की सेल्फ डाली जाए। 1980 के वन संरक्षण कानून में संशोधन कर भूमि हिमाचल सरकार को हस्तांतरित की जाए, ताकि भूमिहीनों व आपदा प्रभावितों को जमीन दी जा सकें। 2006 के वन अधिकार कानून को लागू कर प्रदेश में किसानों को स्थायी पट्टे देकर जमीन एवं घरों का नियमितीकरण किया जाए। किसान सभा की इस बैठक में पवन ठाकुर, मस्त राम, ज्ञान चंद, जगरनाथ, जगदीश चंद, मदन लाल, सुरेश कुमार, गुलाब सिंह, प्रेम चंद, अहिल्या देवी, रमेश चंद, सुमन कपूर, चमन लाल, हल्की, राज कुमार, सागर, शहर सिंह, किशोरी लाल, सुरजीत, धोबू राम, संतोष कुमार, पवना देवी, निर्मला, नीमा, अनिल, सैना देवी, देवेंद्र, नेत्र, रिंकू, कश्मीर, छोटू राम, कृष्ण, मोहित, निखिल, हरि सिंह, श्याम सिंह, मस्त राम, रोशन लाल, निर्मूल सिंह आदि भी उपस्थित थे।

