मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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नाराज़गी एक कोमल भावना है जो रिश्तों में छोटी-मोटी खटास या गलतफहमी से पैदा होती है, लेकिन जब किसी अपने का स्नेह और अपनापन मिलता है, तो यह अपने आप ही मिट जाती है। अपनत्व का स्पर्श नाराजगी को पिघला देता है, क्योंकि प्यार और अपनेपन की गरमी से मन की कड़वाहट दूर हो जाती है, और यह दर्शाता है कि रिश्तों में समझ और भावनात्मक जुड़ाव कितना महत्वपूर्ण है। एक जमाना प्यार, सम्मान और सहयोग का वह भी था, जब पड़ोसी भी परिवार का हिस्सा थे और आज एक ही परिवार में कई पड़ोसी हो गये हैं।
नाराज़गी एक कोमल फूल है, जो केवल अपनत्व की धूप में ही मुरझाता है। यह हमारे रिश्तों की नाजुकता और प्रेम की गहराई को दर्शाता है। अगर हम इस कोमल भाव को प्यार और अपनत्व से सींचें, तो यह रिश्तों को तोड़ने की बजाय उन्हें और भी मजबूत बना सकता है। हमें यह समझना चाहिए कि नाराज़गी अपनों के बीच की दूरी नहीं है, बल्कि उन्हें और करीब लाने का एक मौका है। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम अपने रिश्तों को महत्व दें। नाराज़गी को दिल में पालने की बजाय उसे अपनों के साथ साझा करें और अपनत्व के स्पर्श से उसे खत्म होने का मौका दें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

