मूकनायक/ देश राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
परिवार, समाज और शिक्षा व्यक्ति के विकास के अभिन्न अंग हैं, जो उसे मूल्य सिखाते हैं और एक जिम्मेदार नागरिक बनने में मदद करते हैं। परिवार बुनियादी मूल्य प्रदान करता है, समाज उन मूल्यों को परिष्कृत करता है और शैक्षणिक संस्थान उन्हें औपचारिक बनाते हैं, जिससे एक व्यक्ति का समग्र विकास होता है। एक दूसरे के साथ मिलकर, ये तीनों संस्थाएं व्यक्ति के चरित्र, व्यवहार और सामाजिक योगदान के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती हैं। शिक्षा का उद्देश्य बुद्धि का विकास करना है। किसी अन्य से आगे निकलने के लिए चतुर बनने की कोशिश करना बुद्धिमानी नहीं है क्योंकि जब आप किसी से आगे निकलने की कोशिश करते हैं तो डरे रहते हैं।
शिक्षक की डांट, आलोचना का डर, समाज में अथवा कक्षा में लोकप्रिय नहीं होने का डर बना रहता है, लेकिन जब आप डरते नहीं है तो वहां आपकी बुद्धिमत्ता काम करती है। डर के कारणों को समझने और उसके नादान के लिए शिक्षा बहुत ही जरुरी है। समाज व परिवार के प्रत्येक सदस्य का उज्जवल भविष्य बनाने और डर से मुक्ति दिलाने वाली सबसे बड़ी ताकत शिक्षा ही है और यही शिक्षा का सार है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

