मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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रिश्तों में जब विश्वास और परस्पर सम्मान की कमी हो जाती है तो रिश्तों की डोर कमजोर हो जाती है। कैसे एक पेड़ को लगाने के बाद उसे समय समय पर पानी और खाद देना होता है, वैसे ही हमारे रिश्ते होते हैं । उन्हें भी हमें प्यार ,भरोसे और विश्वाश से सींचना पड़ता है, तभी वो मजबूत होते हैं, अन्यथा जैसे बिना पानी और खाद के पेड़ मुरझा कर सुख जाता है, वैसे ही रिश्तों का पतन हो जाता है।
वहीं रिश्तों की डोर तब कमजोर होती है, जब विश्वास, सम्मान और संचार की कमी होती है। इसके अलावा, स्वार्थ, झूठ, ताने और एक-दूसरे को समझने की कोशिश ना करना भी रिश्तों को कमजोर करते हैं । किसी भी रिश्ते की मजबूती के लिए सम्मान सबसे जरूरी होता है। शादी हो या प्यार का रिश्ता, इज्जत के बिना ये कभी मजबूत नहीं हो सकता। भरोसे और प्यार के साथ-साथ, सम्मान भी किसी भी रिश्ते की नींव होता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

