
मूकनायक/ जहूर अली
बिलासपुर छत्तीसगढ़
मेंहदी इमाम बाड़ा में तीन दिवसीय तख़रीर शबे ग़म (मजलिस) रखा गया मोहर्रम महीने के बाद सफ़र का महीना मुस्लिम कैलेंडर में शुरू हो जाता है जो साल का दूसरा महीना होता है इसी मौके पर अंजुमने हुसैनी जाफरी ईरानिया के द्वारा तीन दिवसीय तख़रीर मजलिस पढ़ने के लिए झारखंड से मौलाना खतीब आली जनाब सैय्यद साबिर रज़ा साहब ने खिताब फरमाएं उन्होंने सीरते पैगम्बर खुदा, हुज़ूर स. व. स के जिंदगी पर रोशनी डाली और पूरे दुनिया के इंसानियत के लिए जीने का तरीका बताकर गए कर्बला और हज़रत इमाम हुसैन के शहादत के मक़सद को बताया इसलिए आज 1447 साल होने के बाद भी हर धर्म मजहब के लोग हज़रत इमाम हुसैन से दर्श हासिल कर रहे हैं पूरी दुनिया में इमाम हुसैन के रास्ते पर चलने के लिए आमादा है, मौलाना साबिर रज़ा के खिताबत के बाद एक शब्बेदारी का इंतजाम किया गया जिसमें शरीक होने के लिए उत्तर प्रदेश लखनऊ से हिन्दुस्तान के मशरूफ मारूफ नोहा खा जनाब शबीये अब्बास आरिज़े साहब पहुंचे और रातभर अपने कलाम और नोहे पढ़े , इस मौके पर पूरे छत्तीसगढ़ से रायपुर, रायगढ़, अंबिकापुर, पेंड्रा मध्य प्रदेश के कटनी, बुढार, सिंगरोली पिपरिया,भोपाल से मातमदारी सीना ज़नी करने अंजुमने अपनी मातमी दस्ते के साथ शिरकत की, बिलासपुर के अंजुमन हुसैनी जाफरी ईरानिया के ज़ेरे सरपरस्ती में इस आज़ादारी को अंजाम दिया गया, जिसमें अंजुमने दुआ ए ज़हरा और अंजुमने हुसैनी शिया जमात बिलासपुर भी शामिल हुए l इस मौके पर तमाम लोगों के लिए एक लंगर का एहतमाम किया गया ओर पानी,शरबत,फल तकसीम किया गया ,शब्बेदारी सुबह 3 बजे तक चला आखिरी में अलविदाई मजलिस मौलाना ज़ीशान हैदर रिज़वी साहब ने खिताब किया और कमेटी के सरपरस्त दिलशेर अली , हशमत ज़मीन नक़वी साहब के हाथों से सभी अंजुमनों को एक मोमेंटो तुखरा देकर सम्मान किया गया इस मौके पर सरताज अली भोला भाई, ज़ाकिर अली, जहूर अली, नमाज़ी अली, साबर अली, अली रज़ा ईरानी, सफदर रिज़वी, अफसर रिज़वी , अल्ताफ हुसैन, बाबर अली, नज़र हुसैन काला ईरानी यावर अली, बेज़ाद अली, मुबारक अली, हाजी बरकत अली, फिरोज़ रिज़वी, अब्बास अली, नज़ीम रिज़वी, कज्जू रिज़वी अज़हर जाफरी अमजद अली के साथ मे सैकड़ों लोग शामिल हुए l

