

मूकनायक
बिलासपुर छत्तीसगढ़
रेल अधिकारी व रेल ठेकेदार के लापरवाही से ठेकेदार के कर्मी जिसक दर्दनाक मौत हो जाने के बाद उनके परिजन व मित्रजन लगातार अनिश्चितकालीन डीआरएम ऑफिस के सामने धरना दे रहे हैं, आज धरना की दूसरी दिन जिला प्रशासन की ओर रेलवे प्रशासन के अधिकारीयो के साथ सिर्फ बातचीत का ही दौर चला और मृतक बर्मन के परिजनों को सिर्फ और सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
गौरतलब है कि बिलासपुर के कोचिंग यार्ड हादसे ने न सिर्फ़ परिवार को उजाड़ दिया बल्कि रेलवे की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और रेलवे से तीन दिन में जवाब मांगा है। लेकिन पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर डीआरएम ऑफिस के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा है।
जब तक मांगे पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
हादसे पर रेलवे प्रशासन ने कहा कि इलाज और मुआवजा नियमों के तहत दिया जाएगा। मण्डल के सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह ने कहा ये घटना बेहद दुखद है। हादसे के बाद तुरंत रेलवे हॉस्पिटल, सिम्स और फिर अपोलो में इलाज कराया गया। इलाज का पूरा खर्च रेलवे और ठेकेदार की ओर से उठाया जा रहा है। जहां तक मुआवजे की बात है, मामला लेबर कमिश्नर को भेजा गया है। जो भी अदालत और श्रम विभाग के आदेश होंगे, उसके मुताबिक़ मुआवजा दिया जाएगा। परिवार को हमने कई बार समझाया है। नियम और प्रक्रिया के मुताबिक़ दो से चार महीने का वक्त लग सकता है, लेकिन जितना जल्द हो सकेगा, उतनी जल्दी सहायता दी जाएगी।

