Thursday, February 26, 2026
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भिंड बुद्ध विहार में डेड बॉडी फ़्रीज़र का दान देकर समाजसेवी बौद्धाचार्य एस.आर. बौद्ध ने दान देने की मिसाइल कायम की

वीरू धनोलिया
मूकनायक/स्टेट हेड मप्र

भिंड।
समाज सेवा ही सच्चा धर्म है यह मानवीय मूल्यों की मिसाल पेश करते हुए प्रख्यात समाजसेवी एवं बौद्धाचार्य एस.आर. बौद्ध ने भिंड स्थित बुद्ध विहार में डेड बॉडी फ़्रीज़र दान स्वरूप प्रदान किया। यह कदम समाज के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है। जिससे अंतिम संस्कार में बड़ी सहूलियत होगी जिससे किसी भी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खो देना सबसे पीड़ादायक क्षण होता है। विशेषकर तब, जब मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार की तैयारियों में समय लगता है और मौसम या अन्य परिस्थितियों के कारण कठिनाइयाँ बढ़ जाती हैं। ऐसे समय पर डेड बॉडी फ़्रीज़र की उपलब्धता परिवारजनों के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगी जिससे लंबे समय तक डेड बॉडी को सुरक्षित रखा जा सकता है डेड बॉडी फ्रिजर दान देने से अब इस सुविधा के आ जाने से अब नगर और आसपास के लोग अपने परिजनों के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक ज्यादा समय तक सुरक्षित रख पाएंगेl आसपास के लोगों ने बताया कि बौद्धाचार्य एस.आर. बौद्ध लंबे समय से समाज में जागरूकता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहयोग की दिशा में कार्य करते आ रहे हैं।
उनकी मान्यता है कि –”समाज सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। जब तक हम दूसरों के दुख को अपना नहीं समझेंगे, तब तक सच्चे मानव होने का दायित्व पूरा नहीं कर पाएंगे।”
डेड बॉडी फ़्रीज़र का दान भी इसी सोच का परिणाम है। उन्होंने इसे बौद्ध विहार को समर्पित कर यह सुनिश्चित किया कि किसी भी परिवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में असुविधा न झेलनी पड़े।
उन्होंने बताया कि यह दान केवल एक मशीन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को मानवीयता और करुणा का संदेश देता है। बुद्ध विहार, जो स्वयं शांति, करुणा और समानता का प्रतीक है, वहाँ इस सुविधा का जुड़ना बौद्ध मूल्यों की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।
इस पहल से अन्य समाजसेवियों, दानदाताओं और संगठनों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे आगे बढ़कर जनता की ज़रूरतों के हिसाब से दान प्रदान करें। समाज के लोगों ने बौद्धाचार्य एस.आर. बौद्ध के डेड बॉडी फ्रिजर दान देने की बहुत प्रशंसा की है। मनीष नागर पंचशील समिति के वॉलेंटियर का कहना है कि इस सुविधा के आ जाने से अब परिवारजनों को मानसिक शांति और सामाजिक सहयोग मिलेगा।
मनीष ने इसे “जनसेवा का अद्वितीय उदाहरण” बताते हुए कृतज्ञता भी व्यक्त की है।
बौद्धाचार्य एस.आर. बौद्ध ने कहा कि “सच्ची सेवा वही है जो दुख की घड़ी में इंसान के काम आए।”आगे बौद्ध जी ने कहा कि इस पहल से काफी लोग दान के लिए आगे आयेगे मै ऐसी आशा करता हूं और यह पहल आने वाले समय में और भी सामाजिक कार्यों को जन्म देगी जिससे समाज में करुणा, सहयोग और मानवता का भाव और प्रबल होगा।

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