मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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रूप, रुपया और घमंड, ये तीनों चीजें अक्सर एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और मानव जीवन में यदि इनका सही उपयोग किया जाए तो ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अन्यथा ये नकारात्मक परिणाम भी ला सकती हैं। रूप, मनुष्य के शारीरिक बनावट को दर्शाता है। रूप का घमंड करना उचित नहीं है क्योंकि यह अस्थायी है। हमें अपनी शारीरिक सुंदरता पर घमंड करने के बजाय, अपने गुणों और प्रतिभाओं पर ध्यान देना चाहिए।
रुपया, धन या पैसा, जीवन जीने के लिए एक आवश्यक वस्तु है क्योंकि यह हमारी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करता है । घमंड, एक नकारात्मक भावना है, जो हमें दूसरों से श्रेष्ठ होने का अहसास कराने के साथ साथ दूसरों को नीचा दिखाने के लिए प्रेरित करता है। घमंड, एक विनाशकारी भावना भी है, जो हमें पतन की ओर ले जाता है और जो व्यक्ति इन तीनों पर नियंत्रण रखता है, वह जीवन में सफल भी होता है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि जीवन क्षणभंगुर है और हमें हमेशा विनम्र, दयालु और सहनशील रहना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

