मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रत्येक समाज की अपनी सामाजिक अपेक्षाएं और मानदंड होते हैं। इन अपेक्षाओं का उल्लंघन करने पर व्यक्ति समाज से अलग-थलग पड़ सकता है क्योंकि अभद्र भाषा का प्रयोग, हिंसा, भेदभाव, और दूसरों का अपमान जैसे अनुचित व्यवहार समाज में नकारात्मक प्रतिक्रिया को जन्म देते हैं। नकारात्मक विचार, बेईमानी और क्रोध व्यक्ति के बाहरी एवं आंतरिक दोनों ही व्यक्तित्व को तहस नहस कर देते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने मार्ग से भटक जाता है और अपने जीवन को नष्ट करने के कगार पर पहुंचा देता है ।
इसके विपरीत जो व्यक्ति स्वयं को निखारने में लगा रहता है, वह स्वयं के साथ साथ दूसरों को भी अपने प्रभाव से निखार देता है। वहीं जो व्यक्ति खुद के दोषों की बजाय दूसरों पर नकारात्मक सोच की नजर रखता है, उससे ईर्ष्या करता है, ऐसा व्यक्ति जीवन में कुछ नहीं कर पाता और अपने कर्मो के कारण समाज में स्वयं गिर जाता है। इसलिए ईर्ष्या नामक बिमारी से दूर रहकर महापुरुषों के विचारों का अनुसरण करते रहे और सुखमय जीवन का आनंद लेते रहें ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

