मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सबके जीवन में विपरीत परिस्थितियां आती है, लेकिन समझदारी इसी में है कि हम परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना उनके गुजरने का इंतज़ार करे। यदि हम प्रभावित होते है तो हम गुस्सा या हताशा होकर जीवन में गलत निर्णय ले सकते हैं । जीवन एक संग्राम है। इसमें वही व्यक्ति विजय प्राप्त करता है, जो परिस्थिति के अनुकूल अपने को ढाल लेता है या जो अपने पुरुषार्थ के बल पर परिस्थिति को बदल देता है। हम इन दोनों में से किसी भी एक मार्ग का या समयानुसार दोनों मार्गों का उपयोग कर जीवन-संग्राम में विजयी हो सकते हैं।
परिस्थितियाँ किसी के साथ हमेशा अनुकूल ही नहीं रहती क्योंकि वे किसी एक वर्ग के द्वारा या एक वर्ग के लिए विनिर्मित नहीं होती। वह साझे का उत्पादन है। जिसमें मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी तथा प्रकृति के अन्तरिक्ष प्रेरित प्रवाह भी सम्मिलित हैं। ऐसी दशा में सदा अनुकूलता की आशा रखे रहना व्यर्थ है। इसके लिए उचित यही है कि अपनी साहसिकता और सहन शक्ति बढ़ाई जाय । जो अनिवार्य है, उसे धैयपूर्वक सहन करना ही बुद्धिमत्ता है क्योंकि हड़बड़ी में गलत निर्णय ही होंगे और इसके साथ साथ संकट भी बढ़ेंगे। जो सम्भव है, उसके लिए उपाय सोचने और प्रयास करने में कमी न रहने दी जाय। दोनों ही दशाओं में सन्तुलन बनाये रखें।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

