मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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इंसान को अपने कार्यों, निर्णयों और उनके परिणामों, चाहे वे सकारात्मक हों या नकारात्मक, उसके लिए जवाबदेही स्वीकार करना ही ज़िम्मेदारी है और इसमें किसी स्थिति में अपनी भूमिका के प्रति ईमानदार होना और अच्छे-बुरे, दोनों तरह के परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहना भी शामिल है। ”जिंदगी” जिंदगी नहीं, एक “जिम्मेदारी” है ! जिसे हम “जीते” कम है और निभाते ज्यादा है ! जिंदगी में कुछ रास्ते सब्र के होते हैं, कुछ रास्ते सबक के होते हैं !
जीवन में कठिन क्षणों का आना भी आवश्यक होता है। यही अवसर अपने और गैरों में फर्क बताता है, कौन आपका हाथ पकड़ता है और कौन छोड़ जाता है ।महत्वपूर्ण यह नहीं की आपकी उम्र क्या हैं! महत्वपूर्ण यह है कि आपकी सोच किस उम्र की है !! जिंदगी को सोचने में गुजारने से अच्छा है जिंदगी को खुलकर जिएं !! एक कवि की दो पंक्तियां याद आती है:- ज़िन्दगी में इतनी शिद्दत से निभाएँ अपना किरदार कि परदा गिरने के बाद भी तालियाँ बजती रहें….
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

