मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बुढ़ापा जीवन का एक खूबसूरत चरण है, जिसमें आप अपने अनुभवों से सीख सकते हैं, अपने प्रियजनों के साथ समय बिता सकते हैं। सक्रिय, स्वस्थ व सामाजिक रूप से जुड़े रहकर और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाकर, आप बुढ़ापे में भी ऊर्जा, उत्साह और उमंग का जीवन जी सकते हैं। महर्षि वाल्मीकि कहते हैं कि उत्साह से बढ़़कर कोई दूसरा बल नहीं है और उत्साही मनुष्य के लिए संसार में कोई भी वस्तु दुर्लभ नहीं है। यदि व्यक्ति चाहे तो पूरी जिंदगी उत्साह-उमंग में काट सकता है, वरना शिकायतों के लिए संपूर्ण जीवन भी कम पड़़ जाएगा। दुखी रहने से जीवन में सफलता के रास्ते बंद हो जाते हैं क्योंकि उस दुख भरी परिस्थिति में उदासी के कारण नकारात्मक विचार हावी हो जाते हैं। वहीं खुश रहने से जीवन में सकारात्मक सोच उत्पन्न होती है जिससे हमारा बुरा समय जल्द विदा लेता है। जीवन मुश्किल नहीं है, बल्कि हम इसे अपनी सोच से कठिन या आसान बनाते हैं।
बच्चे भविष्य देखते हैं, युवक वर्तमान पर नजर रखते हैं और बूढ़े अतीत को झाँकते हैं। यदि बूढ़े लोग अतीत की बजाय भविष्य देखना शुरू कर दें तो उनका ढ़लता जीवन भी ऊर्जा, उत्साह और उमंग से भर जाएगा। मन यदि स्वस्थ और अच्छी अवस्था में हो तो दुःख में भी शीतलता है, परंतु मन यदि क्रोध, चिंता, अवसाद से घिरा है, तो सुख में भी सुलगता अंगारा है। जो इंसान जवानी में सक्रिय नहीं होगा तो जवानी में ही बुढ़ापा आ जायेगा और जो सक्रिय रहते हैं, वे दीर्घायु होते है, बुढ़ापे में भी जवानी का जोश रहता है। सक्रिय रहना, धन कमाना, व्यवसाय करना घमंड नहीं है। यही इंसान जवानी में करता है। इसलिए अपने मन की दशा को ठीक कीजिए, मुस्कुराइए और मन को सकारात्मक बनाइए।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

