Thursday, February 26, 2026
Homeहिमाचल प्रदेश21वीं सदी में बहुपति प्रथा-परम्परा बनाम नारी सम्मान |

21वीं सदी में बहुपति प्रथा-परम्परा बनाम नारी सम्मान |

वीरेंद्र सिंह प्रवक्ता राजनीति शास्त्र शिमला हिमांचल प्रदेश | भारतवर्ष विभिन्नताओं वाला देश हैं क्योंकि यहा अनेक परम्पराएं और रीति रिवाजो का पालन किया जाता हैं ,परंतु समय व परिस्थियों के अनुसार आज के आधुनिक समय में बहुत से रीति रिवाज अतर्कसंगत ,अवैज्ञानिक ,असंवैधानिक ,गैर बराबरी,अमानवीय होते जा रहे हैं | ऐसी ही प्रथा बहुपत्ति प्रथा रही हैं जिसके बारे में इतिहास और समाजशास्त्र के दस्तावेज यह बताते हैं कि बहुपत्ति प्रथा न केवल सिरमौर के गिरीपार का क्षेत्र बल्कि हिमालय के क्षेत्र कांगड़ा ,कुल्लू ,बुशहर ,लाहौल –स्पीति ,किन्नौर और यहा तक कि उतराखंड के जौनसार –बाबर व नेपाल तक बहुपती प्रथा देखने को मिलती थी |दिल्ली विश्वविधलय के शोध “Marriage and sexuality in colonial Himachal Pradesh(1890-1920)” के अनुसार यह प्रथा ब्राह्मणों ,और राजपूतों में भी प्रचलित रही | हिमाचल प्रदेश के कई गजेटियर ,डॉ यशवंत सिंह परमार की पुस्तक “पालीऐन्ड्री इन हिमालय” इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह प्रथा सिराज ,जुब्बल ,किओनथल और पोंटा के ग्रामीण इलाकों में भी प्रचलित रही | जिसका मुख्य कारण पहाड़ी इलाकों में जमीन की कमी और कठिन जीवनशैली के चलते जमीन का बटवारा न होना रहा | 12 से 14 जुलाई 2025 को बहुपत्ति प्रथा का उदाहरण शिलाई क्षेत्र के कुहँट गाव में देखने को मिला जहा दो सगे भाई ने एक ही लड़की से शादी कर ली | जिस कारण बहुपत्ति प्रथा फिर से चर्चा में आ गई हैं यह क्षेत्र हट्टी समुदाय से संबंध रखता हैं जो उतराखंड के जौनसार –बाबर के साथ लगता हैं ,जो 13 सौ वर्ग किलोमीटर में फैले ट्रांस –गिरी क्षेत्र में 154 पंचायते हैं जिसमें से 147 पंचायतों में हट्टी समुदाय रहता हैं | जिसे पिछले साल अगस्त 2024 इसे अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला | क्षेत्र में इस विवाह से प्रदेश व देश में एक बहस छिड़ गई हैं जो कुछ सवाल खड़े कर रही हैं |
नारी की स्वतंत्रता का हनन :-आज के आधुनिक समय में ऐसी प्रथा से महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन होता हैं व यह प्रथा मानवाधिकार का उल्लंघन ,मानवीय गरिमा का अपमान ,स्त्री का वस्तु की तरह उपयोग ,उसकी पसंद व निजता ,मानसिक , भावनात्मक ,शारीरिक के साथ मनोवैज्ञानिक तनाव का होना |
सामाजिक ताने बाने पर चोट :-हिन्दू संस्कृति में भाभी को माँ का दर्जा दिया गया हैं लेकिन बहुपत्ति प्रथा में में उसे पत्नी के रूप में देखा जाता हैं ,जो पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता को भी दूषित करता हैं |
कानूनी स्थिति :-हिन्दू विवाह अधिनियम ,1955 की धारा 5 और 11 के तहत बहुपत्ति विवाह अवैध हैं और भारतीय दंड साहिन्ता की धारा 82 (पूर्व में IPC 494) दंडनीय अपराध हैं |
पौराणिक संदर्भ में इस प्रथा को महाभारत में द्रौपदी का पाँच पांडवों से विवाह एक असाधारण प्रसंग था जो सामाजिक प्रथा में गलत व्याख्या का परिणाम रहा | जोकि द्रौपदी की स्थिति माँ कुंती की अनजानी भूल का परिणाम था |
परंपरा का सम्मान ,तब तक सम्मानीय हैं जब तक यह न्याय , मानवीय मूल्यों व मानवाधिकार के अनुरूप हो | बहुपत्ति विवाह आज के समय में असंगत ,अमानवीय और असंवैधानिक हैं |आज के समाज को यह समझना होगा की परंपरा का सम्मान तभी तक उचित हैं जब तक यह इंसानियत और समानता के मूल्यों का समर्थन करे | आज भी बहुपत्ति प्रथा को गिरिपार से संबंध रखने वाले व्यक्तियों को हेय दृष्टि से देखा जाता हैं |जिसका शिक्षित वर्ग विरोध भी करता हैं |शिक्षा जागरूकता व नीतिगत हस्तक्षेप के माध्यम से इस प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त करना सामाजिक दायित्व हैं |

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments