(गोपाल मेघवंशी) मूकनायक
भीलवाड़ा / तालाबों और नहरों पर कब्जा कर बाली माफिया ने पानी का रास्ता रोका, जिम्मेदार अफसर चुप क्यों रायपुर क्षेत्र में अब तक बजरी माफिया और ब्याज माफिया का नाम आम लोगों की जुबान पर था, लेकिन अब एक नया नाम सामने आया है — बाली माफिया। दरअसल, तालाबों और नहरों पर कब्जा कर ये बाली माफिया ‘प्लाटिंग’ के नाम पर पानी के प्राकृतिक स्रोतों को रोक कर प्लॉट काट रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि रायपुर के आसपास कई ऐसे तालाब और नहरें हैं जिनसे क्षेत्र में पानी पहुंचता है। लेकिन कुछ प्रभावशाली लोगों ने इन पर अवैध कब्जा कर बाली (छोटी नहर/पानी की धार) को रोककर वहां प्लाटिंग शुरू कर दी है। नतीजा यह कि गांवों और खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा और आने वाले समय में इससे गंभीर जल संकट खड़ा हो सकता है।सबसे बड़ा सवाल:चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी मौन हैं। क्या अधिकारियों की चुप्पी किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या फिर जिम्मेदार लोग इन माफियाओं से मिले हुए हैं? यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।स्थानीय लोग डरे-सहमे:कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाली माफिया इतने ताकतवर हैं कि कोई भी उनके खिलाफ आवाज उठाने से डरता है। जिन किसानों की जमीनों से पानी आता था, अब वहां प्लॉट बिकने लगे हैं।क्या कह रहे हैं जानकार:कानूनी जानकारों के अनुसार तालाबों और नहरों पर कब्जा करना सीधा-सीधा जल संरक्षण कानून का उल्लंघन है। प्रशासन को तुरंत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, वरना आने वाले वर्षों में रायपुर क्षेत्र को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।जनता की मांग:रायपुर क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे बाली माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पानी के प्राकृतिक स्रोतों को बचाया जाए।

