
मूकनायक
राजनांदगांव छत्तीसगढ़

राजनांदगांव। महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन हेतु 01 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक कलेक्टर कार्यालय के सामने ओवर ब्रिज के नीचे, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में शांति पूर्ण धरना चल रहा है। धरना स्थल में मनाया गया धम्मचक्र प्रवर्तन दिन एवं गुरू पूर्णिमा भिक्खु धम्मतप ने प्रारंभ किया वर्षावास।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के छत्तीसगढ़ प्रभारी भिक्खु धम्मतप जी ने सभा को संबांधित करते हुए आगे कहते है कि भारत देश में संविधान लागु होने के पूर्व बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) का निर्माण कर बौद्धों को पूर्णतः महाबोधि महाविहार प्रबंधन से वंचित रखा गया। भारतीय संविधान 1950 में लागु हुआ है, बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13, 25, 26 व 29 का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 13 के अनुसार 26 जनवरी 1950 से पहले सभी कानुन, अधिनियम को निरस्त करने का प्रावधान है। देश की आजादी के 75 साल बाद भी यह बी.टी. एक्ट 1949 का चलते रहना संविधान की अवमानना है एवं बौद्धों के साथ अन्याय पूर्ण कानुन है जिसके विरूद्ध बोधगया में 58 सालों से आंदोलन चल रहा है एवं महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को मिलना चाहिए इसके लिए 134 सालों से आंदोलन चल रहा है। इसी तारतम्य में बी.टी. एक्ट 1949 निरस्त किया जाये एवं महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौपा जाये इस उद्देश्य को लेकर दिनांक 12 फरवरी 2025 से पूज्य भदंत प्रज्ञाशील एवं आकाश लामा जी के मार्गदर्शन में आँल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम के माध्यम से बोधगया में अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन चल रहा है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन हेतु राज्य स्तरीय धरना का प्रारंभ 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक कलेक्टर कार्यालय के सामने ओवर ब्रिज के नीचे राजनांदगांव (छ.ग.) में शांति पूर्ण धरना किया जा रहा है।
भारत में मुख्यतः 6 धर्म है, जिसमें से 5 धर्म का प्रबंधन उसी धर्म के अनुयायियों द्वारा किया जाता है, उदाहरणतः हिन्दू धर्म का प्रबंधन हिन्दू अनुयायी द्वारा किया जाता है, मुस्लिम धर्म का प्रबंधन मुस्लिम अनुयायी द्वारा किया जाता है, क्रिश्चियन धर्म का प्रबंधन क्रिश्चियन अनुयायी द्वारा किया जाता है, जैन धर्म का प्रबंधन जैन अनुयायी द्वारा किया जाता है, पारसी धर्म का प्रबंधन पारसी अनुयायी द्वारा किया जाता है, लेकिन बौद्ध धर्म के पवित्र दर्शनीय स्थल के प्रबंधन में गैर बौद्धों का अधिकार है जिसका जीवंत उदाहरण महाबोधि महाविहार है जिसके प्रबंधन में गैर बौद्ध (हिन्दू धर्म) के अनुयायियों का हस्तक्षेप है। जिसका कारण बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) है जिसमें प्रावधान किया गया है महाबोधि महाविहार के प्रबंधन में 4 हिन्दू एवं 4 बौद्ध एवं गया का हिन्दू जिला मजिस्ट्रेट महोदय ही उसके पदेन अध्यक्ष होंगे। अनवरत आंदोलन चलते रहने के कारण सन् 2013 में बिहार सरकार द्वारा संशोधन किया गया इस संशोधन के द्वारा अधिनियम में यह प्रावधान किया गया था कि जिला मजिस्ट्रेट, जो पहले केवल हिन्दू हो सकता था, अब किसी भी धर्म का हो सकता है, और यह महाबोधि महाविहार का पदेन अध्यक्ष होगा। बी.टी. एक्ट 1949 को निरस्त कर गैर बौद्धों को प्रबंधन से हटाकर, पुर्णतः बोधगया (बिहार) महाबोधि महाविहार का प्रबंधन बौद्धों को सौपा जाये ऐसी मांग करते हुए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार को ज्ञापन सौपा गया।
धरना आंदोलन के तारतम्य में भदंत धम्मपाल, राजनांदगांव, कन्हैयालाल खोब्रागडे़, आयु. बुद्धिमित्रा वासनिक, नंदा मेश्राम, वंदना मेश्राम, कौशल्या मेश्राम, हर्षिता गजभिये, मीना श्रीरंगे, संदीप कोल्हाटकर, शिवशंकर सिंह गौर, जयंत मेश्राम मोहला, ए. के. महेश्वरी कुमर्रा, सुशांत कुमार, भीमराव बागड़े, श्रामनेर कौण्डन्य (दीलिप रामटेके), श्रामनेर पटिसेन (राजेश मेश्राम), श्रामनेरी आम्रपाली (रविता बौद्ध), श्रामनेरी पटाचारा (माया वासनिक), श्रामनेरी बुद्धप्रिया (नीति दामले), कुणाल बोरकर, संजय हुमने, सागर रामटेके, संतोष बौद्ध, अनिल जनबंधु, लक्ष्मा गजभिये, देवपाल रामटेके अन्य लोगों ने सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन राजु बारमाटे ने किया।

