
मूक नायक/राजेश रामटेके
बालाघाट(मध्यप्रदेश)

बालाघाट। महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के तत्वावधान में 10 जुलाई 2025 को जिला स्तरीय त्रिरत्न बुद्ध विहार, बौद्ध नगर, कोसमी, बालाघाट में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत पूज्य भदन्त धम्मशीखर द्वारा परित्राण पाठ और ध्यान साधना के साथ हुई।
पूज्य भदन्त धम्मशीखर ने आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर उपोसथ के महत्व को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि तथागत बुद्ध ने उपोसथ की शिक्षा मन को शुद्ध, पवित्र, शांत और एकाग्र करने के लिए दी थी। उपोसथ का उद्देश्य उपासना नहीं, बल्कि द्वेष, घृणा, ईर्ष्या और दुर्भावना को नष्ट करना है। उन्होंने कहा कि उपोसथ का भोजन से कोई संबंध नहीं है।
धरना स्थल पर पूज्य भदन्त धम्मशीखर जी और सामाजिक वक्ताओं ने महाबोधि महाविहार को बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने केंद्र सरकार, बिहार सरकार और सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि:
- महाबोधि महाविहार को शीघ्र बौद्धों को सौंपा जाए।
- इसका प्रबंधन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय के नियंत्रण में दिया जाए।
प्रदर्शन में सैकड़ों उपासक और उपासिकाएँ शामिल हुए, जिन्होंने महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की प्रमुख मांगें हैं:
- महाबोधि महाविहार का प्रबंधन पूर्ण रूप से बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
- बोधगया टेंपल एक्ट, 1949 को तुरंत रद्द किया जाए।
- बौद्ध धार्मिक मामलों में राज्य के हस्तक्षेप को समाप्त किया जाए।
यह आंदोलन बिहार के बोधगया में 12 फरवरी 2025 से चल रहे धरना प्रदर्शन का हिस्सा है, जहाँ बौद्ध भिक्षु और अनुयायी महाबोधि महाविहार को गैर-बौद्ध नियंत्रण से मुक्त करने और 1949 के बोधगया टेंपल एक्ट को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
यह धरना प्रदर्शन बौद्ध समुदाय की आस्था और अस्मिता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आंदोलनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे हैं और सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।

