मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा ही बन जाता है । मनुष्य की बाहरी दुनिया उसके अंदर उत्पन्न विचारों का ही प्रतिफल है। अतः मस्तिष्क से निकले विचारों का हमारे शरीर, स्वास्थ्य और परिस्थिति से गहरा संबंध है। अक्सर अंतर्मन की नकारात्मक उर्जा विवेक और बुद्धि को भ्रमित कर देती है जिसके कारण कर्मो में अशुद्धि आ जाती है और कर्म फल का बंधन आरोपित हो जाता है। अनेक इच्छाओं के कारण मन की स्थिरता समाप्त हो जाती है, जिससे सही और गलत का विवेक भी क्षीण हो जाता है। हम बिना विचारे ऐसे कर्मों में प्रवृत्त हो जाते है जिनका दूरगामी परिणाम शुभ नहीं होता । इसलिए प्रकृति का अनुग्रह पाने के लिए निष्पाप रहिए और निष्पाप होने के लिए सरलता को सीढ़ी बना लीजिए।
मन में दूषित विचार की लहर उठे तो तत्काल उसकी दिशा बदल दीजिए। अगर ये लहरें सुनामी का रूप ले बैठी तो जीवन का जहाज ही डूब जाएगा। प्रकृति के आनंद रूपी रास्ते पर कदम बढ़ाने के लिए अपना स्वभाव अच्छा बनाइये। गंदे स्वभाव से महापुरुष तो क्या, आपके पड़ोसी भी नफरत करते हैं। हमेशा विश्वास रखिए: सबसे अच्छा दिन आज है। सबसे अच्छा समय अभी है। सबसे बुरा दिन कभी नहीं था। बाकी:- माता-पिता को देखकर मुस्कुरा लिया करो, क्या पता किस्मत में तीर्थ लिखा ही ना हो…
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

