
मूकनायक/ राजनांदगांव
छत्तीसगढ़
शांतिनगर करुणा बुध्द विहार में वर्षावास कार्यक्रम के दूसरे दिन पूज्य भन्ते दित्ती विशुद्धि जी के द्वारा “मन की स्वतंत्रता” के विषय में जानकारी प्रदान किया गया। मन की स्वतंत्रता के बगैर, मनुष्य बिना जंज़ीरों के भी ग़ुलाम की तरह होता है।बुद्ध ने मन की स्वतंत्रता और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए एक मार्ग दिखाया है, जो तृष्णाओं पर विजय प्राप्त करने, आत्म-निर्भर बनने, और सत्य और शुद्ध आचरण पर आधारित है।मन की स्वतंत्रता को नियंत्रित करने के लिए, बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग का पालन करने की सलाह दी। इसमें नकारात्मक विचारों से बचना, और फिर उन्हें हटाकर, ‘सम्यक प्रयास’ का अभ्यास करना शामिल है। एक बार जब यह हो जाता है, तो सकारात्मक सोच के अभ्यास से, व्यक्ति मन की एक स्वस्थ और शांत अवस्था प्राप्त कर सकता है।
बौध्द सेवा समिति एवं रमाआई महिला मंडल, करुणा बुध्द विहार शांतिनगर राजनांदगांव (छ. ग.) द्वारा आयोजन किया था।

