मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मनुष्य के सर्वागीण विकास में उसके आचरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छा आचरण उसे परिवार व समाज में विशेष स्थान दिलाता है। सदाचारी व्यक्ति का सभी आदर करते हैं तथा वह सभी के लिए प्रिय होता है। सदाचरण के बिना किसी भी समाज में मनुष्य प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं कर सकता। जीवन रूपी गाड़ी को बिना बाधाओं के चलाते रहने में सद्व्यवहार अहम भूमिका निभाता है। व्यवहार व आचरण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जब तक आचरण शुद्ध नहीं होगा, तब तक व्यक्ति में सद्व्यवहार का गुण विकसित नहीं होगा। सच बोलना, चोरी न करना, किसी को दुख न देना, बड़ों का सम्मान करना तथा नैतिक मूल्यों की रक्षा करना जैसी सारी बातें आचरण की श्रेणी में आती हैं।
बहुत-सी किताबें पढ़ लेने पर भी यदि हम उनके ज्ञान को अपने जीवन में अपने अंदर नहीं उतारते, तो हमारी स्थिति उस चरवाहे जैसी है, जो गायें तो खूब चराता है, परंतु उनका दूध नहीं पी पाता। भूत- भविष्य की चिंता करने की बजाय समाधान का चिंतन कीजिए । मन में व्यथा पालने की बजाय व्यवस्था को ठीक कीजिए । प्रशंसा में उलझने की बजाय प्रस्तुति को बेहतर कीजिए । बाकी:- कल भी कल के लिए जी रहे थे, आज भी कल के लिए जी रहे हैं। जरा गौर से सोचिए… आज को आप आज के लिए पूरी तरह कब जिएँगे ? बिंदास जियो, जी भर के । याद रखना चरण उन्हीं के पूजे जाते हैं, जिनका आचरण पूजनीय होता है…
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

