मूकनायक//देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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वैसे तो मनुष्य का सबसे बड़ा दुख जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसा रहना है, जिसे आवागमन भी कहा जाता है। इस चक्र से मुक्ति पाने के लिए मनुष्य को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अज्ञानता, पाप कर्म और दूसरों से अपनी तुलना करना भी दुखी होने के बड़े कारण हैं। जीवन में सुख व्यक्ति के अहंकार की परीक्षा लेता है और दुःख व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा लेता है । माना कि इंसान का सबसे मुश्किल काम होता है “सहनशील बन कर चलना”, मगर सच तो यह भी है कि जिसने सुनना सीख लिया, उसने सहना सीख लिया और अहंकार को त्याग कर जो व्यक्ति सुख और दुख दोनों में संतुलित रहता है, वही जीवन में सफल भी होता है।
यह भी एक दुखद सच्चाई है कि दुख की घड़ी में अपने भी दूर हो जाते हैं, लेकिन यह भी सच है कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दुख में भी साथ खड़े रहते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम दूसरों के प्रति सहानुभूति रखें और उनकी मदद करें, चाहे वे किसी भी स्थिति में हों। कहते हैं : घर से बाहर दिमाग लेकर जाओ क्योंकि दुनिया एक बाजार है, लेकिन घर के अंदर सिर्फ दिल लेकर आओ, क्योंकि यहाँ एक परिवार हैं । बड़े-बुजुर्ग भी कहते है, किसी का “मज़ाक” और अपना “पैसा” काफी सोच समझकर उड़ाना चाहिए क्योंकि इन दोनों चीजों से आपके अंदर स्थित “व्यक्तित्व” और “अभिमान” का रूप झलकता है।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

