—–तीन माह में नहीं आया पटवारी प्रतिवेदन, अन्य पक्षकारों को नोटिस भी जारी नहीं—–

मूकनायक/छत्तीसगढ़
अधिवक्ता दीपा रामटेके ने जिलाधीश राजनांदगॉव के पास ममता नगर के गार्डन में अवैध कब्जा कर निर्माण की शिकायत सहित प्रकरण दाखिल किया था जिसे तत्कालिक कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्वयं सुनवाई ना करते हुए, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राजनांदगंव को भेज दिया, जिसे तहसीलदार राजनांदगॉव को भेज दिया, जबकि उक्त प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व व तहसीलदार सहित नगर पालिक निगम को भी पक्षकार बनाया गया है।
बाकायता तहसीलदार ने ऑफलाईन प्रकरण 19 मार्च को दर्ज किया और आदेश पत्रक में अनावेदक को आहूत करने व हल्का पटवारी से रिपोर्ट का लेख है, तब से 6 सुनवाई पर भी ना तो हल्का पटवारी ने प्रतिवेदन दिया है और ना ही संबंधित अन्य पक्षकारों को प्रकरण में उपस्थित होने का विधिवत नोटिस जारी किया है।
प्रकरण को देखने से लगता है कि इस गंभीर मुद्दे को सभी प्रशासनिक अधिकारी टॉल रहे है, या तो पटवारी की पहुच वाला है जो तहसीलदार के प्रतिवेदन प्रस्तुत हेतु जारी नोटिस पर भी निर्धारित समय पर प्रतिवेदन नहीं दें रहा है।
सरकार सहित आला अधिकारी शिविर व कैम्प लगाकर लोगों की समस्याओं का दावा कर रहें वहीं राजस्व प्रकरण के त्वरित निराकरण के लिये तहसीलों में शिविर लगा रहें है. जबकि पूर्व से लंबित प्रकरण वैसे के वैसे ही लंबित पडे है।
यह एक प्रशासनिक लापरवाही है, जो भ्रष्टाचार को जन्म देती है. एेसे अधिकारी, कर्मचारी, पटवारी पर वैधानिक कार्यवाही होनी चाहियें।
दीपा रामटेके ने प्रेस को बताया कि वे तहसीलदार राजनांदगॉव सहित हल्का पटवारी की लिखित शिकायत कलेक्टर राजनांदगॉव सहित शासन को करेगी, यदि इस प्रकरण में त्वरित सुनवाई नहीं हुई तो वे हाईकोर्ट में प्रकरण लगायेगी।

