मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
बुद्धिमानी से किए गए कार्य योजनाबद्ध, दूरदर्शी और परिणामोन्मुखी होते हैं। सतर्कता से किए गए कार्य सावधानीपूर्वक और चौकन्ने रहकर किए जाते हैं, जबकि मूर्खता से किए गए कार्य बिना सोचे-समझे और बिना किसी परिणाम पर विचार किए जाते हैं। इसीलिए काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी है, काम करते हुए सोचना सतर्कता है और काम करने के बाद सोचना एक मूर्खता है। दूसरों के शब्दों के शोर में अपने अंतर आत्मा की आवाज न दबाने दें। सुनिये सबकी, सीखिए सबसे, परंतु कीजिए वही, जिसे करने की प्रेरणा हमें हमारी अंतरात्मा दे ।
इसलिए अपने हर कार्य को इतने मन से कीजिए, मानो इसी पर ही हमारा जीवन टिका हो। रात दिन मत देखिए, प्रयास तब तक जारी रखिए, जब तक उसके परिणाम से संतुष्ट ना हो जाएँ। हमेशा याद रखना जीवन में वे कार्य अवश्य कीजिए, जिन्हें हम अपनी मृत्यु के बाद भी याद रखवाना चाहते हैं या ऐसा कुछ लिख लीजिए, जो पढ़ने लायक हो या ऐसा कुछ कर लीजिए, जो लिखने लायक हो । बाकि बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि संभाल कर रखी हुई चीजें और ध्यान से सुनी हुई बातें, कभी ना कभी काम आ ही जाती हैं।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

