मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शिक्षा व्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है क्योंकि यह एक अलग पहचान प्रदान करती है। शिक्षा केवल वह नहीं है जो हम अपने स्कूल या विश्वविद्यालय से प्राप्त करते हैं, यह उन सभी चीजों के बारे में भी है, जो हम आत्म-मूल्यांकन, परिवेश या अपने किसी और से अनुभव करते हैं और सीखते हैं। हमने अक्सर सुना है कि सीखने के लिए इंसान की उम्र कभी भी कम नहीं होती है । ऐसा इसलिए है, क्योंकि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जो जन्म से शुरू होती है और मृत्यु तक चलती है।
शिक्षा का लक्ष्य है- खाली दिमाग को खुले दिमाग में बदलना। खाली दिमाग शैतान का घर बनता है, परंतु खुला दिमाग विशिष्ट चिंतन, ज्ञान-विज्ञान और जीवन- विकास के प्रकाश से प्रकाशित होता चला जाता है। पुस्तकों को अपना जीवन-साथी बनाइये। ये किसी निजी मित्र की तरह जहां हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी, वहीं मां की तरह हमारा साहस और आत्मविश्वास भी बढ़ाती रहेगी….
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

