Thursday, February 26, 2026
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विश्व रक्तदाता दिवस विशेष: एक समर्पित प्रयास – 3000 यूनिट से अधिक रक्तदान एवं हजारों चेहरों पर मुस्कान लाने की प्रेरक कहानी

मूकनायक, अजीम खान चिनायटा

राजस्थान, करौली, हिंडौन

करौली/हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है ताकि स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले लोगों का आभार जताया जा सके। इस दिन का उद्देश्य रक्तदान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाना और स्वस्थ लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना है।
इस अवसर पर हम बात कर रहे हैं दीपेश लहकोड़िया जैसे युवा समाजसेवियों की, जिन्होंने न केवल रक्तदान को एक मिशन बनाया, बल्कि अपने नेतृत्व में समाज को नई दिशा दी।
तीन वर्षों का समर्पण – 15 रक्तदान शिविर और 3000 यूनिट से अधिक रक्तदान
करौली के बरगमां निवासी दीपेश लहकोड़िया जयपुर में रहकर पढ़ाई करते है 24 साल की अपनी उम्र में दीपेश खुद चार बार रक्तदान कर चुके है एवं पिछले चार वर्षों में अपने स्वयंसेवी संगठन के माध्यम से 15 से अधिक रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया। इन शिविरों में अब तक 3000 से अधिक यूनिट रक्त संग्रहण सहित कई सैकड़ों लाइव डोनेशन कर उन्होंने अनेकों ज़िंदगियों को नया जीवन देने के साथ साथ हजारों परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने का कार्य किया है
इनका उद्देश्य केवल रक्तदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक जागरूकता अभियान भी रहा है – जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों, कॉलेजों और शहरी बस्तियों में लोगों को रक्तदान के प्रति भ्रांतियों से मुक्त करने का कार्य भी किया गया।
रक्तदान के साथ साथ इन्होंने टीम के साथ मिलकर जरूरतमंद लोगों को खाना वितरण, वस्त्र वितरण आदि का कार्य कर मानवता की एक मिसाल पेश की
क्यों खास है दीपेश का प्रयास?
❖ समर्पित नेतृत्व: सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर शिविरों का आयोजन।
❖ टीम निर्माण: युवाओं को जोड़कर एक सक्रिय रक्तदाता नेटवर्क तैयार करना।
❖ इमरजेंसी सपोर्ट: ज़रूरत पड़ने पर तत्काल रक्तदाता की व्यवस्था करना।
❖ जागरूकता फैलाना: सोशल मीडिया और जनसंपर्क के माध्यम से आमजन को जागरूक करना।

एक प्रेरणा बनता चेहरा
आज जब कई लोग समाज सेवा को केवल मंच तक सीमित रखते हैं, दीपेश लहकोड़िया जैसे कर्मठ युवा मौन सेवा से ज़िंदगियों को रोशनी दे रहे हैं। इनका यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
” दीपेश लहकोड़िया कहते है कि
मानव सेवा उनको मानसिक सुकून प्रदान करती है एवं हर इंसान को मानवसेवा करनी चाहिए । कोरोना और डेंगू जैसी भयंकर स्थिति में लोगों को परेशान देखकर मिली प्रेरणा से जरूरतमंद असहाय लोगों की मदद की ठानी और दिन रात की परवाह किए बिना निस्वार्थ भाव से जरूरतमंद मरीजों को ऑनस्पॉट के साथ साथ रक्तदान शिविर लगाकर रक्त उपलब्ध करवाने का जिम्मा उठाया
लहकोडिया बताते है कि उनकी टीम का प्रत्येक सदस्य निस्वार्थ भाव से रक्तदान करता है और मरीज का पानी तक भी नहीं पीता “
रक्तदान महादान है।
आपका एक यूनिट रक्त किसी की पूरी ज़िंदगी बदलने के साथ साथ उस पूरे परिवार को मुस्कान प्रदान कर सकता है।
आइए, दीपेश जैसे समाज सेवकों से प्रेरणा लें और रक्तदान को अपनाएं।

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