
मूकनायक
छत्तीसगढ़
लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, चुनावी पारदर्शिता और मूलनिवासी बहुजन समाज के अधिकारों की रक्षा हेतु भारत मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बहुजन कांति मोर्चा एवं राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के तत्वाधान में बहुजन समाज के देशभर के हजारों संगठनों के समर्थन के साथ 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रव्यापी भारत बंद घोषित किया गया है। यह आआंदोलन आएसएस बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार की मूलनिवासी बहुजन समाज एवं देशविरोधी विरोधी विभिन्न नीतियों और सरकारों द्वारा बहुजन समाज के ऐतिहासिक व संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा के खिलाफ किया जा रहा है।
‘भारत बंद’ के प्रमुख मुद्दे एवं माँगेः-
1. ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाए।
भारत की चुनावी प्रणाली में ईवीएम (EVM) की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे है। चुनावों में हो रहे धांधली के कई सारे उदाहरण सामने आऐ है। भारत की जनता का ईवीएम (EVM) मशीन के द्वारा किए जा रहे चुनाव प्रक्रिया पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा है। किसी भी प्रकार के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मुक्त, निश्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव आवश्यक है. जिसके लिए बैलेट पेपर प्रणाली पुनः लागू की जाना आवश्यक है, सभी आम चुनावों में EVM के बजाय बैलट पेपर लागू करने के लिए।
2. ओबीसी एवं सभी जातियों की जाति आधारित जनगणना तुरंत कराई जाने के लिए। आरएसएस-बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार ने ओबीसी और सभी जातियों की जनगणना करने से पहले से ही इनकार एवं विरोध किया है जो सामाजिक न्याय के लि है। संविधान में शिकार और सुविधा सुनिक्षित करने का है। साथ अवय सभी समुदायों की भी जनक है। जिसके पानी सभी जाति की जाति पनकीरी यही इसके लिए ओबीसी की जानी के लिए और इसके आधार पर सभी जातियों की सामाजिक स्थिति हो और नीतियों समाचता के आधार पर बनाई जाने के लिए
3. मूलनिवासी बहुजन महापुरुयों की आरएसएस और भाजपा द्वारा संसद में की गई अवमानना का विरोध।
दिशा के महान महापुरुष डॉ बाबासाहब अम्बेकरी के बारे में आरएसएस बीजेपी द्वारा सचालित वर्तमान केंद्र सरकार के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में अभद्र टिप्पणी करते हुए, अवमानना की गयी है। इसी तरह से हर बार आरएसएस बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार के सम्बंधित पदाधिकारियों और व्यक्तियों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज छत्रपति संभाजी महाराज राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, राजर्षि शाहूजी महाराज, डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर पेरियार रामासामी, बिरसा मुडा आदि महापुरुषों का अपमान सत्ताधारी दलों द्वारा किया जा रहा है। संसद में आरएसएस बीजेपी द्वारा बहुजन महापुरुषों के योगदान की नजरअंदाज करना और उनका अपमान करना निदनीय है। इस बात को हम कतई बर्दास्त नहीं करेंगे। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और संसद में इन महापुरुषों के योगदान की उचित सम्मान करने की माँग करते हैं।
4. बोधगया के महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए-
बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार, जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, वह मूलनिवासी बहुजन समाज की धरोहर है। वर्तमान में इस ऐतिहासिक स्थल पर ब्राह्मणवादी पंडितों का कब्जा है. जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। हम माँग करते हैं कि महाबोधि महाविहार को पूरी तरह से बौद्ध अनुयायियों के नियंत्रण में दिया जाए।
5. वक्फ संशोधन विधेयक-2025 असंवैधानिक है-
वक्फ संशोधन विधेयक-2025 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26, 29 में निहित समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के मूल सिद्धांतों को उल्लंघन करता है। इससे वक्फ की स्वायत्तता समाप्त हो जायेगी और वक्फ की संपत्तियों पर पूंजीपतियों और सरकारी भू माफियाओं का अवैध कब्जा हो जायेगा। इस असंवैधानिक काले कानून को तुरत खारिज करने की माँग करते है।
6. धर्मांतरण का झूठा आरोप लगाकर संविधान विरोधी आर एस एस के लोगों द्वारा मूलनिवासी ईसाईयों को देश भर में प्रताड़ित किया जा रहा है। आदिवासियों के बीच घुसपैठ कर आर. एस. एस. के लोगों के द्वारा ईसाई धर्म के आधार पर आदिवासी समाज में धार्मिक भेदभाव कर आपस में इन्हें लड़ाये जा रहा है।
7. आजाद भारत में संविधान को 15 वर्षी, लेकिन आदिवासियों की पावती अनुसूची में पदत हक अधिकार आज तक न लागू हुए और न ही प्रधाव में दिखे। पापदी अनुसू की बात करने पर उल्टे आदिवासियों के ऊपर ही केस दर्ज किए जा रहे हैं और जेल भी भेजा जा रहा है। आरएसएस बीजेपी की एवं उनके द्वारा संचालित विद्यमान केंद्र एवं राज्य सरकारों की इस अधिवासियों के दमनकारि नीति के विरोध में।
8. मूलनिवासी बहुजन समाज के तबकों को संवैधानिक हक अधिकारों से वंचित रखने के लिए एवं उन्हें प्रताड़ित करने के लिए स्थानीय कार पर सरकारें एवं प्रशासन के द्वारा इनपर कई तरीके से अन्याय एवं अत्याचार किए जाते है। इसके खिलाफ स्थानिय मुद्दों को लेकर संबंधित प्रशासन को ज्ञापन दिए गए है। इन सभी स्थानीय स्तर के बहुजन समाज से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना आवश्यक है। इस भारत बंद आंदोलन के तहत हर जिलेमें एवं स्थानीय स्तर पर बहुजन समाज के ऊपर हो रहे सामाजिक, राजकीय, आर्थिक, सास्कृतिक रूप में किये जा रहे गंभीर स्थानीय मुद्दों को भी उठाया गया है। सरकार और जिता प्रशासन यंत्रणा को इन मुद्दों पर ध्यान देकर इसका तुरंत समाधान करना चाहिए।
////संवैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से ‘भारत बंद’।/////
भारत बंद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (2) एवं 19 (1) (b) के तहत भारत के समस्त नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के अंतर्गत किया गया जा रहा है। अनुच्छेद 19 (1) (३) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। अनुच्छेद 19 (1) (b)-प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार है।
पुरुषोत्तम कुमार जिला संयोजक भारत मुक्ति मोर्चा जिला बिलासपुर में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी।

