मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर परिवारों में शक नामक बिमारी एक ऐसी विकट समस्या है, जो हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को आग लगा देती है। चाहे आप रिलेशनशिप में हों या फिर शादीशुदा जीवन बिता रहे हों, अगर किसी बात पर आपके साथी के दिल में आपको लेकर शक पैदा हो जाए, तो रिश्ते टूटने में देरी नहीं लगती। इस मामले में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं शक का शिकार होती हैं। उदाहरण के तौर पर परिवार में पति व पत्नी एक साथ बैठे हैं और उसी समय मां का फोन आने पर पत्नी अपने पति से दूर कोने में जाकर गोपनीय बात करती है, पति सोचता है कि यह किस गैर आदमी से बात कर रही है और यही से शक होने पर रिलेशनशिप काफी तनावपूर्ण हो जाता है और बात-बात पर गहमागहमी हो जाती है। कई बार शक की वजह से महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार भी हो जाती हैं, वहीं कुछ मामलों में शक होने पर हत्या जैसे मामले भी सामने आते हैं।
शक करने के बहुत नुकसान होते हैं। यह न केवल व्यक्तिगत संबंधों को खराब करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। शक करने से व्यक्ति हमेशा तनाव और चिंता में रहता है, जिससे उसकी खुशियाँ छिन जाती हैं और वह अकेलापन महसूस करने लगता है। परिवार की बुनियाद विश्वास रूपी मजबूत नींव पर खड़ी होती है जिसमें शक रूपी बिमारी की दीमक उस बुनियाद को खोखला कर देती है और इस प्रकार परिवार रूपी महल भरभराकर गिर पड़ता है अर्थात परिवार नष्ट हो जाता है । इसलिए अपनी सहनशक्ति, धैर्य और सूझबूझ से हमें शक नामक बिमारी से बचना चाहिए ।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

