मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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तनाव एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो इंसान की जिंदगी में ज़ंग लगा देती है। इनसान खुद को भूल जाता है और उलझनों में उलझ जाता है। ये तनाव इंसान की जिंदगी से खुशियां छीन लेता है और जिंदगी को गम व परेशानियों के सैलाब में डुबो देता है। तनाव एक मानसिक और शारीरिक प्रतिक्रिया है जो किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव या चुनौतियों के कारण पैदा होता है। तनाव हमारे शरीर और मस्तिष्क की एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया होती है। वैसे कुछ समय का तनाव हमें कठिन स्थिति से निपटने के लिए प्रेरित करता है, लेकिन ये तनाव अगर लम्बे समय तक बना रहे तो हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
काम का दबाव, पारिवारिक कलह, गरीबी, रिश्तों का बिखराव, शारीरिक समस्याएं, दुखद अनुभव और जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ही तनाव के प्रमुख कारण हैं । जीवन में टेंशन लेने से कुछ नहीं बदलता, लेकिन एक्शन लेने से सब कुछ बदल सकता है । ज़िन्दगी में टेंशन ही टेंशन है, फिर भी इन लबों पे मुस्कान है क्योंकि जीना जब हर हाल में है तो मुस्कुराकर जीने में क्या नुकसान है ! वास्तव में नादान व्यक्ति ही जीवन का आनंद लेता है ! ज्यादा होशियार व्यक्ति तो हमेशा समस्याओं में उलझा रहता है ! जीवन जितना सरल होगा, उतना ही आसान होगा । “जीवन” जितना सादा रहेगा, “तनाव” उतना ही आधा रहेगा क्योंकि तनाव, प्रेम का शत्रु है और मुस्कान, प्रेम की जननी है ।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

