मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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“मन पर दबाव या बोझ महसूस करना ही मानसिक तनाव है ।” यह एक ऐसी स्थिति है, जहां व्यक्ति को लगता है कि वह अपनी भावनाओं, विचारों या परिस्थितियों से अभिभूत है और इससे निपटने में कठिनाई हो रही है। वर्तमान समय में लोग अपने स्वयं के व्यवहार व कार्य की अधिकता की वजह से थकान के साथ-साथ मानसिक तनाव में चिंताग्रस्त रहते हैं । इससे मनुष्य ना तो अपने काम पर ध्यान दे पाता है और ना ही अपने परिवार पर। जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है, परिस्थितियों चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरुर
अक्सर व्यक्ति जब सामने वाले से अपनी बराबरी करता है और उसमें असफल रहता है, तब वो मानसिक तनाव में चला जाता है और ऐसी अवस्था में वह अपने मन मुताबिक अपने जीवन को जी नहीं पाता। ज्यादा पैसा कमाने की होड़ में व्यक्ति दिन रात काम करता है और जब उतना पैसा नहीं कमा पाता है, तब भी वह मानसिक तनाव में रहता है। ऐसे हालात में थकान व मानसिक तनाव का खामियाजा सभी को उठाना पड़ता है । इसकी वजह अक्सर स्वयं की अव्यवहारिक कार्यशैली, क्रोध, धैर्य की कमी, नींद की कमी, अधिक परिश्रम व परिवार से तालमेल ना होना हो सकती है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी, मूकनायक, हरियाणा

