मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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प्रसन्नता, चिराग (दीपक) और हवा जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब हम खुश होते हैं, तो हमें लगता है कि हमें मार्गदर्शन मिल रहा है और हम आगे बढ़ सकते हैं। दीपक हमें प्रकाश देता है और हवा हमें गति प्रदान करती है। इन तीनों तत्वों को एक साथ मिलाकर हम जीवन को एक सुंदर और सार्थक बना सकते हैं। प्रसन्नता इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप अपने जीवन के समीकरण को सकारात्मक और नकारात्मक अनुभवों तथा मनोवृत्तियों के बीच किस प्रकार से संतुलित करते हैं। संबंधों की कुल पांच सीढियां होती है ! देखना, अच्छा लगना, चाहना और पाना, यह चार बहुत सरल सीढ़ियां हैं । सबसे कठिन पांचवी सीढ़ी है, निभाना..।
एक अच्छे व्यक्ति में ईमानदारी, सहानुभूति, दया, क्षमा, संयमता, विनम्रता, जिम्मेदारी, उदारता, सकारात्मकता और कृतज्ञता आदि गुणों का होना इंसान को ना केवल खुद बेहतर बनाते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक योगदान देते हैं । कहते है कि पत्तों का हर बदलता रंग खूबसूरत होता है और जीवन की हर बदलती परिस्थिति सार्थक होती हैं, दोनों के लिए स्पष्ट दृष्टि की जरूरत होती हैं। बाकी:- अपनी रोशनी की बुलंदी पर कभी न इतराना मेरे दोस्त, चिराग़ सब के बुझते है, हवा किसी की नहीं होती…
बिरदीचंद गोठवाल
नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

