Thursday, February 26, 2026
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खुशी बांटने से बढ़ती है और खुशी के फूल उन्हीं के जीवन में खिलते हैं, जो अपनों से अपनों की तरह मिलते हैं हर सुबह

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सुप्रभात कहने के पीछे यही संदेश होता है कि आज आपकी सुबह या आपका दिन शुभ हो, खुशियों और रोशनी से भरा हो परंतु क्या हम खुद को भी कभी सुप्रभात की शुभकामनाएँ देते हैं? बात बहुत छोटी है, परंतु जीवन में अक्सर छोटी-छोटी बातें ही बड़ा असर डालती हैं। हम दूसरों को सुप्रभात कहते हैं, लेकिन कई बार खुद दिन भर परेशान व तनावग्रस्त रहते हैं। नकारात्मक भावों में उलझे रहते हैं। ऐसे में दूसरों को सुप्रभात कहने का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता। ये तो सामान्य सा नियम है कि दूसरों को आप वही दे सकते हैं, जो आपके पास है।
सुप्रभात कोई साधारण शब्द नहीं, बहुत ही अर्थपूर्ण शब्द है । सु-सुबह से शाम तक आप, प्र- प्रसन्नता-पूर्ण, भा – भाग्यशाली एवं त – तनाव रहित रहें । प्रत्येक सुबह सूर्य कहता है, मेरी तरह जागो। आकाश कहता है, मेरी तरह लक्ष्य ऊँचा रखो। हवा कहती हैं, मेरी तरह सबको तरो ताजा रखो क्योंकि नाकारात्मक परिवेश में भी सकारात्मक सोच ही हमें सफल होने की राह दिखाती है। खुशी हमेशा बांटने से बढ़ती है और खुशी के फूल उन्हीं के जीवन में खिलते हैं, जो अपनों से अपनों की तरह हर सुबह मिलते हैं ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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