Thursday, February 26, 2026
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अच्छाई और बुराई दोनों हर इंसान के अंदर ही मौजूद हैं, इंसान जिसका प्रयोग अधिक करते हैं, उसी के अनुरूप आता है निखार

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अच्छाई और बुराई, दोनों जीवन का हिस्सा हैं। अच्छाई एक सकारात्मक भावना, गुण या कार्य को संदर्भित करती है, जबकि बुराई नकारात्मक भावना, गुण या कार्य को दर्शाती है। अच्छाई से सुख आता है, वहीं बुराई से दुःख आता है। कोई भी इंसान दुख के बिना कभी भी सुखी होने का आनंद नहीं ले सकता और जितने ज्यादा दुखी होते होते हो तो इंसान के सुखी होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए, “अच्छाई और बुराई का निखार” एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो हमें खुद को बेहतर बनाने और समाज को बेहतर बनाने में मदद करता है।
तालाब एक ही होता है, उसी तालाब में हंस मोती चुनता है और बगुला मछलियां… सोच सोच का फर्क है, आपकी सोच ही आपको बड़ा बनाती है। अपने जीवन में दूसरों की तरह बनने की कोशिश करने वाले लोग अक्सर ख़ुद की पहचान भी खो देते हैं । इसलिये अपनी महत्वता को बरकरार रखने के भरपूर प्रयास करते रहें । वैसे भी जीवन में डबल रोल करने वाला इंसान आखिर में एक भी रोल करने के काबिल नहीं रहता है । अच्छाई और बुराई दोनों हमारे अन्दर ही है, हम जिसका प्रयोग अधिक करते हैं, वही निखर कर आती हैं और उसी से आपका व्यक्तित्व बनता है ।
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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