Thursday, February 26, 2026
Homeदेशसबसे बड़ी साधना अपने आप को जानना और स्वयं के विकास पर...

सबसे बड़ी साधना अपने आप को जानना और स्वयं के विकास पर है ध्यान केंद्रित करना

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
साधना का अर्थ है स्वयं के स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए, राष्ट्र के लिए त्याग करना है। वस्त्रों का त्याग साधना नहीं हो सकता लेकिन किसी वस्त्रहीन को देखकर अपना वस्त्र देकर उसके तन को ढक देना ही आवश्यक साधना है। ऐसे ही भोजन का त्याग भी साधना नहीं है। किसी भूखे की भूख मिटाने के लिए भोजन का त्याग साधना है। दूसरों के लिए विष तक पी जाने की भावना के कारण ही तो भगवान शिव महादेव बने। जो स्वयं के लिए जीये वो देव, जो सबके लिए जीये वो महादेव ।
सबसे बड़ी साधना अपने आप को जानना और स्वयं के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। इसमें अपने मन, शरीर और आत्मा को समझने का प्रयास शामिल है। यह साधना सभी अन्य साधनाओं की नींव है और इसे आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाता है। आज का आदमी धर्म को जीने की बजाय खोजने में लगा है। धर्म ना तो सुनने का विषय है, ना बोलने का, सुनते-बोलते धर्ममय हो जाना है। धर्म आवरण नहीं, आचरण है। धर्मं चर्चा नहीं चर्या है..!!
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments