मूक नायक समाचार मध्यप्रदेश।संजय सोलंकी की रिपोर्ट।
भोपाल:मध्यप्रदेश में हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने प्रदेश सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार अब “घर-घर सिंदूर” पहुंचाने की योजना बना रही है। यह दावा एक यूजर द्वारा किए गए पोस्ट से उपजा, जिसमें कहा गया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और नौकरी जैसे अहम मुद्दों को पीछे छोड़कर सरकार अब “सिंदूर वितरण” पर ध्यान दे रही है। इस पोस्ट ने विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।पोस्ट में लिखा गया, “रोज़गार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे रह गए पीछे… अब सुहाग के सामान की चिंता सरकार को है।
क्या 9 जून से ‘विकास’ की जगह अब ‘सिंदूर वितरण योजना’ चलेगी?” इस पोस्ट को विपक्षी नेताओं ने हाथों-हाथ लिया और सरकार पर तंज कसते हुए इसे प्रचार का नया हथकंडा करार दिया। इसी मुद्दे पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने कहा कि “मध्यप्रदेश में 5 छात्रों ने हाल ही में बोर्ड परीक्षा में असफल होने के बाद आत्महत्या कर ली, लेकिन सरकार का ध्यान ‘सिंदूर’ जैसे प्रतीकों पर है। क्या यह जनता की प्राथमिकताएं हैं?” उन्होंने सरकार से शिक्षा और रोजगार पर ठोस कदम उठाने की मांग की।वही कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी अपनी फ़ोटो लगाकर ऑपरेशन सिंदूर की मार्केटिंग करते हुए कह रहे हैं कि उनकी रगों में सिंदूर बह रहा है, लेकिन जशोदाबेन की मांग में भरे सिंदूर का सम्मान कब करेंगे?” यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे बहस और तेज हो गई है।पूर्व में हुए 7 मई 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया। इस अभियान में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों को 22 मिनट में नष्ट कर दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश के संकल्प और साहस का प्रतीक बताया था। हालांकि, कुछ बीजेपी नेताओं के विवादित बयानों ने इस अभियान को राजनीतिक रंग दे दिया, जिसके बाद विपक्ष ने इसे प्रचार के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
क्या हे सिंदूर अभियान की सच्चाई:
सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि 9 जून से सरकार एक महीने तक “घर-घर सिंदूर” अभियान चलाएगी, जिसमें सांसद रोज 15-20 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट व्यंग्यात्मक हो सकती है, जो सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने के लिए की गई। दूसरी ओर, कुछ लोग इसे ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश से जोड़ रहे हैं।सरकार का पक्ष: सरकार की ओर से अभी तक इस कथित “सिंदूर वितरण योजना” पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बीजेपी के प्रवक्ता ने इसे विपक्ष की साजिश करार देते हुए कहा कि सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत नीति का प्रतीक है, और इसे गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।जनता की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया पर जनता के बीच इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे सरकार का प्रचार स्टंट मान रहे हैं, तो कुछ इसे राष्ट्रवाद से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सिंदूर देश की शक्ति का प्रतीक हो सकता है, लेकिन बेरोजगारी और महंगाई का क्या?” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की ताकत दिखाई, विपक्ष को सिर्फ आलोचना करने की आदत है।”यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब विपक्षी दल इसे लोकसभा में उठाने की कोशिश करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि विकास के अहम मुद्दों से ध्यान न भटके।फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि “घर-घर सिंदूर” अभियान कोई आधिकारिक योजना है या सोशल मीडिया पर उड़ाई गई अफवाह। लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि क्या सरकार की प्राथमिकताएं वाकई में जनता की जरूरतों के अनुरूप हैं, या यह सिर्फ एक और राजनीतिक नौटंकी है?

