मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि आदमी जिस तरह के लोगों के बीच रहता है, उसी संगत के आधार पर उससे उसके विचार बनते हैं, उन विचारों से उसकी आदत बनती है और उस आदत से उसका चरित्र बनता है । वहीं कोई व्यक्ति चोरों के बीच में बैठकर चोरी करने के नए नए तरीके ही सीखेगा क्योंकि वहां बात चोरी से संबंधित हो रही है। अन्य कुछ सुनने को नहीं मिलेगा और वही व्यक्ति यदि किसी व्यापारी के पास बैठेगा तो कमाने के नए-नए विचार सुनने को मिलेंगे । वह भी कमाने की सोच बनाएगा । एक ही व्यक्ति भिन्न भिन्न विचारों वाले व्यक्तियों में से किसके विचारों को मान कर अपने जीवन को प्रभावित करता है, यह उस व्यक्ति पर निर्भर करता है । एक सफल और सुखद जीवन के लिए सकारात्मक सोच का होना बहुत जरूरी है। सकारात्मक सोच होने से आप किसी भी बड़ी समस्या का हल निकाल सकते हैं। खुद को डिप्रेशन के साथ ही कई मनोविकारों से बचा सकते हैं ।
कोई मनुष्य कितना ही अच्छा तथा भला क्यों न हो यदि हमारे विचार उसके प्रति दूषित हैं, विरोध अथवा शत्रुतापूर्ण हैं तो वह जल्दी ही हमारा विरोधी बन जायेगा। विचारों की प्रतिक्रिया विचारों पर होना स्वाभाविक है। इसको किसी प्रकार भी वर्जित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं यदि हमारे विचार स्वयं अपने प्रति ओछे अथवा हीन हो जाएं, हम अपने को अभागा एवं अक्षम चिन्तन करने लगें तो कुछ ही समय में हमारे सारे गुण नष्ट हो जायेंगे और हम वास्तव में दिन-हीन और मलीन बन जायेंगे। हमारा व्यक्तित्व प्रभावहीन हो जायेगा जो समाज में व्यक्त हुए बिना बच नहीं सकता। इसलिए एक सफल और सुखद जीवन के लिए सकारात्मक सोच का होना बहुत जरूरी है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

