मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
आप किताबों से सीखा हुआ भूल जाएंगे लेकिन जीवन की किताब से जो सीख मिलती है, वह आपके जीवन की छाया बनकर हमेशा आपके साथ चलती है। जीवन की किताब का हर पन्ना आपके मन पर एक याद बनकर हमेशा के लिए आपके अंदर कहीं छुप जाता है । ये घटनाएं अच्छी और बुरी दोनों ही तरह की हो सकती है और इनका प्रभाव आपके वर्तमान पर आपको साफ दिखाई देगा। हर मानव के जीवन में उतार चढ़ाव, कठिन समय और विषम परिस्थितियां आती रहती हैं। संकट का समय और विषम परिस्थितियां जीवन के अलग-अलग पहलू हैं। अपने धैर्य का परिचय देकर संकटों की परवाह ना कर जो आगे बढ़ता है, वहीं उच्च मनोबल वाला साहसी व्यक्ति होता है क्योंकि मानव के जीवन में साहस और उच्च मनोबल ही सफलता की कुंजी है।
परिस्थितियाँ किसी के साथ भी हमेशा अनुकूल नहीं रहती क्योंकि वे किसी एक वर्ग के द्वारा या एक वर्ग के लिए विनिर्मित नहीं होती। वह साझे का उत्पादन है जिसमें मनुष्य ही नहीं, अन्य प्राणी तथा प्रकृति के अन्तरिक्ष प्रेरित प्रवाह भी सम्मिलित हैं। ऐसी दशा में सदा अनुकूलता की आशा रखे रहना व्यर्थ है। साथ ही अनावश्यक और हानिकारक भी। इसके लिए उचित यही है कि अपनी साहसिकता और सहन शक्ति बढ़ाई जाय । जो अनिवार्य है, उसे धैयपूर्वक सहन करना ही बुद्धिमत्ता है क्योंकि हड़बड़ी में गलत निर्णय ही होंगे और इसके साथ साथ संकट भी बढ़ेंगे। जो सम्भव है, उसके लिए उपाय सोचने और प्रयास करने में कमी न रहने दी जाय। दोनों ही दशाओं में सन्तुलन बनाये रखें। जिस भी व्यक्ति ने विषम परिस्थितियों में रास्ता निकालने का साहस करके आगे बढ़ने का प्रयास किया है, वह सफल भी हुआ है जिसके फलस्वरूप कठिन परिस्थितियों में मनुष्य के लिए अपने मनोबल को सदैव विनम्रता, संयम और साहस के साथ ऊंचा रखना ही हितकारी है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

