मूकनायक /करनाल/ हरियाणा
संपादक हरियाणा प्रदेश रमेश पोडिया
चौक चौराहों सहित चौपालों शहरों नगरों सहित घर घर में हो रही चर्चा
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बनी विंग कमांडर व्योमिका सिंह की बहादुरी व शौर्य को देख हर कोई खुद को गौरान्वित महसूस कर रहा है। वे हर नारी वर्ग के लिए प्रेरणा बन चुकी है। देश के स्कूलों कॉलजों और विश्वविद्यालय परिसरों में उनके नाम की गूंज है, जहां उनके परिजनों को बधाई दी जा रही है वहीं रिश्तेदारों को भी बधाईयां दी जा रही है। व्योमिका सिंह के पति ग्रुप कैप्टन दिनेश सभरवाल के छोटे भाई डाॅ.विकास सभरवाल विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।
वे बताते हैं कि व्योमिका भारतीय वायु सेना में वर्ष 2004 में बतौर पायलट नियुक्त हुई थी तथा वे चेतक एवं चीता हैलीकॉप्टर उड़ाने में पारंगत हैं। वह देश की पहली महिला हैलीकॉप्टर पायलट हैं, जिन्हें मास्टर ग्रीन कार्ड रेटिंग हासिल है। मास्टर ग्रीन कार्ड रेटिंग उन श्रेष्ठतम पायलटों को दी जाती है जो कि दुर्गम परिस्थितियों एवं खराब मौसम में भी उड़ान भरने का असाधारण साहस, क्षमता एवं निपुणता रखते हों।
उन्होंने अनेक बार जम्मू और कश्मीर एवं पूर्वोत्तर राज्यों में दूरस्थ तथा लंबी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एवं चुनौतीपूर्ण मौसम में रेस्क्यू तथा इवेक्यूएशन मिशन में अग्रणी भूमिका निभाई है। अपने दो दशक लंबे करियर में उन्होंने पैरा जंपिंग, पर्वतारोहण, समुद्र में सेलिंग तथा स्कूबा डाइविंग जैसे पेशेवर कोर्सों में भी प्रमाणीकरण प्राप्त किया है।
डॉ विकास सभरवाल के मुताबिक दिल्ली में जन्मी व्योमिका ने सेंट एंथनी स्कूल, हौज़ खास से पढ़ाई की थी। स्कूल में एनसीसी कैडेट भी रहीं और उसी दौरान उनका रूझान सेना में बढ़ने लगा था। स्कूल में बेस्ट एथलीट का अवार्ड भी प्राप्त किया। दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज (वर्तमान में दिल्ली टेक्नोलॉजिकल विश्विद्यालय) से एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पति ग्रुप कैप्टन दिनेश सभरवाल भी वायु सेना में पायलट हैं तथा इसी कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं। असाधारण सेवाओं के चलते वर्ष 2022 में गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति द्वारा उन्हें वायु सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। हैदराबाद एयर फोर्स अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान प्री- फ्लाइट ट्रेनिंग कोर्स में विंग कमांडर व्योमिका सिंह को सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी कैडेट के अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इससे दो वर्ष पूर्व उनके पति ग्रुप कैप्टन दिनेश सभरवाल को भी यह अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा, ट्रेनिंग के दौरान ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में आठ गोल्ड मेडल जीतने पर उन्हें बेस्ट आउटडोर ट्रेनिंग कैडेट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
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प्रतिष्ठित परिवार से संबंध रखती है व्योमिका सिंह
उनके पिता आरऐस निम दिल्ली सरकार में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त प्रिंसिपल हैं तथा ससुर श्री प्रेम चंद सभरवाल हरियाणा सरकार से सेवानिवृत्त उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त हैं। उनकी माता करुणा सिंह एनसीईआरटी में बतौर अंडर सेक्रेटरी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं तथा सास कमला प्रदेश के शिक्षा विभाग से हेडमिस्ट्रेस पद से सेवानिवृत्त हुईं। वहीं डाॅ.विकास सभरवाल की पत्नी डाॅ कंवलजीत विर्दी डीएवी महिला महाविद्यालय करनाल में भूगोल विभाग की अध्यक्ष है।
सामाजिक सरोकार से जुड़े समाजसेवी कर रहे बहादुरी की चर्चा
अद्वितीय योगदान ने बनाया एक आदर्श : अनिल रंगा
सामाजिक चिंतक अनिल रंगा ने कहा कि विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाबी हमले में भारत की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शामिल होकर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। जिसके लिए चर्चा में आई कमांडर व्योमिका सिंह की देश भर के लोग चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई विशेष अभियान चलाए और कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनकी बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई है। कमांडर व्योमिका सिंह की कहानी अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने उन्हें एक आदर्श बना दिया है। जिनपर समाज सहित हर किसी को नाज है।
बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने दिलाई अद्वितीय पहचान : राम
अंबेडकर ऐड सोसाइटी के संस्थापक सदस्य राम चौहान ने कहा कि कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी पर हमें नाज है दोनों बहादुर नारी भारतीय सेनाओं में जांबाज अधिकारी हैं। उनकी बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने उन्हें एक अद्वितीय पहचान दिलाई है। जिनकी बहादुरी के चर्चे देश के हर कौने में लोगों द्वारा की जा रही है जो उनकी बहादुरी के लिए बनती भी है। युवाओं को उनके हौसलों से शिक्षा लेकर आगे बढ़ाना चाहिए।
कमांडर व्योमिका सिंह ने दिलाया सम्मान : राजेंद्र
राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कमांडर व्योमिका सिंह का जन्म एक सैन्य परिवार में हुआ था। उनके पिता भी एक सैन्य अधिकारी थे। उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद भारतीय नौसेना में शामिल होने का निर्णय लिया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह के ससुर भिवानी जिला के रहने वाले प्रेम सिंह सभरवाल हरियाणा सरकार से सेवानिवृत उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त है जो करनाल जिला में बतौर अपनी सेवाएं दे चुके है। उन्होंने कहा कि व्योमिका सिंह पर आज पूरे देश को नाज है। उन्होंने अपनी बहादुरी और अद्वितीय योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए। ऐसी बेटी को हर घर में जन्म लेना चाहिए।
देशभक्ति की भावना को मिला बढ़ावा : अशोक कुरलन
करनाल से अधिवक्ता अशोक कुरलन का कहना है कि व्योमिका सिंह और सोफिया कुरैशी की बहादुरी के चर्चे हर जगह हो रहे हैं। उनकी बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। जिससे देश के युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। उनकी बहादुरी और अद्वितीय योगदान ने लोगों को प्रेरित किया है और उन्हें अपने जीवन में चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रोत्साहित किया है वहीं देशभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया है और हमें अपने देश के प्रति गर्व महसूस कराया है।

