मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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दुष्ट व्यक्ति हमेशा झूठ बोलता है और दूसरों को धोखा देने की कोशिश करता है । वह स्वार्थी होता है और दूसरों की पीड़ा या कठिनाइयों को नज़रअंदाज़ करता है । वह दूसरों को किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है । वह अपने असली मकसद को छिपाकर काम करता है । यदि कोई व्यक्ति इस बात को जान लेता है कि उसका बर्ताव गलत है तो उस बर्ताव को रोक न पाना उसके घमंड की निशानी नहीं हो सकती क्योंकि घमंडी व्यक्ति अपने बर्ताव को गलत करार देता ही नहीं, वह बहाने बनाते हुए अपने गलत व्यवहार को भी सही ठहराता है| कई बार व्यक्ति अपने गलत बर्ताव को इसलिए नहीं सुधार पाता क्योंकि उसे गलत बर्ताव करने की आदत पड़ चुकी होती है और वह बिना सोचे-समझे व्यवहार करता रहता है| इसलिए जब तक उसे एहसास होता है कि उसका कोई व्यवहार गलत है, वह आदतानुसार अपना व्यवहार पूरा कर चुका होता है| इस वजह से अपने बर्ताव को गलत मानकर सुधारने का प्रयास कर लेना केवल एक पहला कदम है । बर्ताव सुधरने की यह स्वीकृति अपने आप में काफी नहीं है|
दुष्ट, झूठा, स्वार्थी और परपीड़ा को नजरंदाज करने वाला व्यक्ति अपने नकारात्मक प्रभावों के कारण समाज और खुद दोनों के लिए हानिकारक माना जाता है । अपवाद हर विषय में मिल जाते हैं। सन्यासियों की संगति में आकर रत्नाकर डाकू लोकप्रसिद्ध रामायण के रचियता बन गए। इसी प्रकार महात्मा बुद्ध के सम्पर्क में आने पर अंगुलिमाल डाकू उनका प्रिय शिष्य बन गया। ऐसे उदाहरणों से इतिहास भरा हुआ है । जहाँ सज्जनों की संगति में दुष्ट अपनी बुराइयों को दूर करके महापुरुष बन गए। बस केवल खोजने भर की देर है। वाल्मीकि व अंगुलीमाल डाकू दोनों ही महात्माओं की संगति में महान बने तथा उन्होंने समाज को दिशा देने का कार्य किया, परंतु ऐसे कुछ ही लोग हैं जो अंगुलियों पर गिने जा सकते हैं। अब आप अपनी तर्क बुद्धि और विवेक से विचार करें कि हम इन दुष्ट लोगों के साथ कैसा व्यवहार करें? क्योंकि दुष्टता का प्रतिकार करने के लिए बुद्धि, विवेक, धैर्य और दृढ़ता की आवश्यकता होती है।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

