Thursday, February 26, 2026
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जब कोई इंसान बेवजह परेशानी में मजाक उड़ाता है और खुशी में ईर्ष्याभरे शब्दों में ताना मारता है तो वह नहीं है आपका शुभचिंतक

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जो लोग आपका मजाक उड़ाते हैं, तो शायद वो वह खुद कमजोर हैं । इसीलिए आपका मजाक उड़ाते हैं। आप का मजाक उड़ाने से उन्हें महसूस होता है कि वह बड़े हो गए या बड़े बन गए । जब वो आपका मजाक उड़ाते हैं तो आपको बुरा लगता है । आपको लगता है कि आप कुछ है ही नहीं । सबसे गहरा दुख तो तब होता है, जब हमारे अपने लोग विश्वासघात करते हैं या जब हम गंभीर शारीरिक या मानसिक दुखों से जूझते हैं। कोई कितना ही करीबी क्यों ना हो ,यदि वह आपकी खिल्ली उड़ा रहा है, आपका उपहास कर रहा है, तो निश्चित ही वह आपका शुभचिंतक नहीं है और दूसरों की हंसी उड़ाने वाले लोग एक दिन खुद भी मजाक का पात्र बन जाते हैं । ऐसे लोग समाज में इज्जत नहीं पाते । किसी की मजबूरी का मजाक बनाना इंसानियत के खिलाफ है । ये आदतें इंसान को बर्बादी की ओर ले जाती हैं और उनके कई दुश्मन बन जाते हैं, जो समय आने पर नुकसान पहुंचाते हैं ।
रहिम ने अपने दोहे में कहा है कि “रहिमन निज मन की व्यथा, मन ही राखो गोय । सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लैहैं कोय।।” कहने का अर्थ यह है कि मन की व्यथा यानि अपने दुखों को छिपाकर ही रखें क्योंकि अधिकतर लोग दूसरों के दुःखों का मजाक ही उड़ाते हैं । दुखों को बांटकर कम करने वाले लोग बहुत ही कम हैं। दूसरों का मजाक उड़ाना अच्छी आदत नहीं है। यह अनुचित है और दूसरों को बुरा लगता है। इससे दूसरों के साथ संबंधों पर असर पड़ता है। इससे दूसरों के विश्वास को टूटने का खतरा भी होता है। इसलिए हमें हमेशा दूसरों का सम्मान करना चाहिए और उन्हें बुरा नहीं कहना चाहिए।
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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