मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं, कुछ तो हमेशा एक दूसरे की देखा देखी करते हैं और एक दूसरे से आगे बढ़ने की कौशिश करते हैं और हमेशा ही उनका मन अशांत रहता है। दूसरे वो लोग हैं जो केवल जीवनावश्यक वस्तुओं से अपना गुजारा कर लेते हैं, परंतु ईमानदारी, सच्चरित्रता, सच्चाई, सरलता तथा दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना वे अपने जीवन का आदर्श मानते हैं। ये अपने सीमित साधनों से अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं और हमेशा खुश रहते हैं। लाल बहादुर शास्त्री जी बिल्कुल इसका सही उदाहरण है, उनका जीवन और उनका रहन – सहन सादा था लेकिन उनके विचार बहुत ही उच्च और नेक थे। ईमानदारी, सच्चरित्रता, सच्चाई, सरलता तथा दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना ही सादा जीवन और उच्च विचार प्रकट करता है। ऐसे ही महान लोगों के गुणगान को सदैव याद किया जाता है।
वैसे जीवन का सबसे बड़ा सत्य यह भी है कि यहां सब कुछ नश्वर है। जो भी चीज़ें हमारे पास हैं, चाहे वह पैसा हो, रिश्ते हों, हमारा शरीर हो या हमारी भावनाएं हों, ये सब कुछ एक दिन समाप्त हो जाता है। झूठ में आकर्षण अवश्य होता है, परंतु स्थिरता “सत्य” में ही होती है क्योंकि शब्दों का वजन तो बोलने वाले के भाव पर आधारित है ! यहां एक शब्द मन्त्र हो जाता है, एक शब्द गाली कहलाता है, परंतु वाणी ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचय कराती है । कुछ लोग होते स्वस्थ हैं, लेकिन बताते बीमार हैं । होते अमीर हैं, बताते गरीब हैं । होते सुखी हैं, लेकिन बताते दुखी हैं । जैसा विचार वैसा जीवन के सिद्धांत पर वे सचमुच में दुखी, बीमार और गरीब बनने की ओर अग्रसर होते रहते हैं, जबकि सच्चाई और सरलता में जिया गया जीवन ही सुखमय बनता है..
लेखक: बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी, मूकनायक हरियाणा

