मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अमीर और गरीब व्यक्ति की मृत्यु के बाद राख में कोई अंतर नहीं होता है। मृत्यु के बाद शरीर के जलने के बाद राख में केवल शरीर के प्राकृतिक तत्वों का अवशेष रहता है, और इसमें व्यक्ति के धन या सामाजिक स्थिति का कोई असर नहीं होता है । अमीर और गरीब व्यक्ति के शव में अंतर केवल जीवनकाल में होता है। अमीर व्यक्ति के पास धन, संपत्ति और बेहतर सुविधाएँ होती हैं, जबकि गरीब व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं होती हैं और मृत्यु के बाद, यह अंतर समाप्त हो जाता है और सभी की राख में कोई अंतर नहीं रहता है ।
उदाहरण के तौर पर एक साधू शमशान में दो चिताओ की राख को बड़े ध्यान से देख रहा था । किसी ने पूछा कि बाबा ऎसे क्यूं देख रहे हो, राख को ? साधू बोला कि ये एक अमीर की लाश की राख है जिसने ज़िंदगी भर काजू बादाम खाये और ये एक ग़रीब की लाश है, जिसे दो वक़्त की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मिलती थी, मगर इन दोनों की राख एक जैसी ही है, फिर किस चीज़ पर आदमी को घमंड है, मैं वही देख रहा हूं जिसके फलस्वरूप इंसान को घमण्ड, ईर्ष्या आदि से दूर रहकर समान रूप से एक दूसरे से सद्व्यवहार करना ही हितकारी है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

