मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सबको खुश रखना शायद आपके हाथ में ना हो, परंतु सब में खुश रहना हमारे लिए अवश्य संभव है। सुख दुख तो जीवन में लगा रहता है, दोनों के होने पर ही एक दूसरे का एहसास होता है । कुछ लोग सहानुभूति पाने के लिए झूठ मूठ अपने को दुखी दिखलाते है तो कुछ हर हाल में मस्त रहना सीख जाते हैं । हमेशा खुश रहने के लिए सबसे पहले अपने अंदर एक बच्चे जैसा मन पैदा कीजिए, जो हर चीज में अपने लिए खेल ढूंढ कर खुश हो जाता है । खुशी पैसे से खरीदी जा सकने वाली चीज नहीं है, इसे तो आपको अपने अंदर से ही पैदा करनी होगी । छोटी छोटी बातों से खुश होना सीख जाइए, हमेशा खुश ही रहेंगे । यदि बड़ी खुशियां नहीं मिलती हैं तो छोटी खुशियां लेने से ना कतराएं । हर परिस्थिति में अपनी मन: स्थिति को पॉजिटिव बनाना जीवन की खुशहाली का मूल मंत्र है। चिंता और चिता दोनों ही जलाने का काम करती है। चिता शव को जलाती है और चिंता शांति को।
अक्सर काम करने में जब हमारा मन नहीं होता, तो हम काम को कल पर टालते रहते हैं। इससे हमारे काम का बोझ और तनाव दोनों बढ़ जाते हैं। कई बार हम ऐसा भी करते हैं कि किसी काम को अधूरा करके छोड़ देते हैं। यह सोचकर कि इसे बाद में खत्म कर देंगे, लेकिन ऐसा करने से भी आपके दिमाग को किसी उपलब्धि का अनुभव नहीं हो पाता है, जिस वजह से हमें खुशी महसूस नहीं होती है। इसलिए चिंता पालने की बजाय यह विश्वास जगाएं कि प्रकृति सुबह सबको भूखा जरूर उठाती है, परंतु किसी को भूखा नहीं सुलाती । भरोसा रखिए- कीड़ी को कण मिलता है, तो हाथी को मण। जीवन में घटना-दुर्घटना होना तो जीवन का ही हिस्सा है, परंतु उस घटना का सामना कैसे करना है, पॉजिटिविटी यही सिखाती है…
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

