मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के परिवर्तनशील माहौल में समय के साथ बदलते समाज में दिखावे की प्रवृत्ति तेज़ी से बढ़ रही है। आजकल ज्य़ादातर लोग दूसरों के सामने अपनी नकली छवि पेश करते हैं। समाज में दिखावा करने वाले लोग वे होते हैं जो अपने बारे में ज़्यादा बताना चाहते हैं या दूसरों पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं । दिखावा करने वाले लोग अक्सर घमंड या अहंकार से काम करते हैं । मनुष्य का अनर्गल दिखावा, धौंस, दबदबा और रुतबा आदि मस्तिष्क में नकारात्मक विचार उत्पन्न करते हैं । इसके चलते आरम्भ में मनुष्य को अपना बड़प्पन और सम्मान दिखाई देता है, लेकिन इस प्रकार का बड़प्पन और सम्मान कभी स्थाई नहीं होता और मनुष्य को इन प्रवृत्तियों के चलते एक न एक दिन परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है ।
आजकल केवल रहन-सहन में ही नहीं, बल्कि रिश्तों के मामलों में भी लोग नकली व्यवहार करने लगे हैं। यहां तक कि प्यार जैसी कोमल और सच्ची भावना में भी अब दिखावे की मिलावट हो रही है। आज की युवा पीढ़ी में रिश्तों के प्रति पहले जैसी ईमानदारी नज़र नहीं आती। लोग मन ही मन दूसरों के बारे में बुरा सोचते हैं, परंतु उनके सामने अच्छा बने रहने का ढोंग करते हैं। मनुष्य के नकारात्मक जीवन का असर आने वाली पीढ़ी पर भी गलत पड़ता है और इस प्रकार आने वाली पीढ़ी उसी का अनुसरण करती है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

