Thursday, February 26, 2026
Homeदेशशब्दों की वास्तविक शक्ति, वास्तविकता को आकार देने, कार्य शुरू करने और...

शब्दों की वास्तविक शक्ति, वास्तविकता को आकार देने, कार्य शुरू करने और खुद को परिभाषित करने में है निहित

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍🏻✍🏻
शब्द शब्द में, ब्रह्म हो, शब्द शब्द में, सार, शब्द, सदा ऐसे कहो, जिनसे, उपजे प्यार। शब्दों की ताकत को कभी, कम मत आंकिए…सिर्फ एक वक्तव्य आदमी को पल भर में, नायक से खलनायक बना सकता है..!! इसलिए संत शिरोमणि कबीरदास जी भी कहते हैं कि “कुटिल वचन सबते बुरा, जारि करे सब छार। साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।।” जिसका भावार्थ यह है कि कड़वे बोल सबसे ज़्यादा बुरे होते हैं, जो पूरा शरीर जला देते हैं, जबकि मधुर वचन शीतल जल की तरह हैं और जब बोले जाते हैं तो ऐसा लगता है कि अमृत बरस रहा है। शब्द चाबियों की तरह होते हैं, यदि आप उन्हें सही से चुनते हैं तो वे किसी का भी दिल खोल सकते हैं और किसी का भी मुंह बंद कर सकते हैं ।
सकारात्मक विचार ही हमारे सबसे बेहतरीन साथी है क्योंकि सही शब्दों का उपयोग करके आप दूसरों को प्रेरित, उत्साहित या प्रोत्साहित कर सकते हैं। गलत शब्दों से किसी को ठेस भी लग सकती है। इसलिए, अपने शब्दों को सोच-समझकर उपयोग करना और नकारात्मक शब्दों की जगह सकारात्मक शब्दों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है । यह अनिवार्य नहीं है कि इससे सफलता मिलेगी लेकिन चुनौतियों का सामना करने की शक्ति अवश्य मिलेगी । शब्दों की वास्तविक शक्ति, वास्तविकता को आकार देने, कार्य शुरू करने और खुद को परिभाषित करने में निहित है, इन्हें बुद्धिमानी से चुनें और अच्छे के लिए सही शब्दों का उपयोग करें । बाकी:- संसार का सबसे बड़ा न्यायालय हमारे मन में है, इस मन को सब पता है, क्या सही है और क्या ग़लत है..
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments