Thursday, February 26, 2026
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विज्ञान प्रौद्योगिकी क्षेत्र में होने वाली खोजों का लोग उठा रहे हैं लाभ तो दूसरी तरफ यही शिक्षित लोग अंधविश्वास और रूढ़िवादी कुरुतियों के बन रहे हैं शिकार

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आधुनिक युग को विज्ञान का युग कहना गलत नहीं होगा। आज के जमाने में प्रत्येक व्यक्ति विज्ञान पर बहुत अधिक निर्भर है, हर घटना के पीछे का कारण विज्ञान है, फिर चाहे वह चक्रवात हो, तूफान या वर्षा होना हो या फिर पानी का उबलना और जमना आदि। विज्ञान केवल उपकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पृथ्वी से ब्रह्मांड तक विज्ञान को देखा जा सकता है। आसान शब्दों में विज्ञान के अभाव में व्यक्ति का जीवन कठिनाइयों से भर जाता है। विज्ञान एक ऐसा विषय है जिसकी सीमा तथा क्षेत्र दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। विज्ञान भी ज्ञान ही है। जो ज्ञान तार्किक होता है और प्रमाण सहित होता है, वही विज्ञान है। जैसे सब चोर आदमी होते हैँ परंतु सब आदमी चोर नहीँ होते । ठीक इसी प्रकार से सारा विज्ञान ज्ञान है परंतु सारा ज्ञान विज्ञान नहीँ है । ज्ञान और विज्ञान दोनों ही आवश्यक हैं। ज्ञान से हमें जीवन के बारे में व्यापक दृष्टिकोण मिलता है, जबकि विज्ञान उस ज्ञान को व्यवस्थित और प्रमाणिक रूप में प्रस्तुत करता है। दोनों के बीच का सामंजस्य हमारे जीवन को समझने और उसे बेहतर बनाने में मदद करता है।
भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा न केवल प्राचीन काल में बल्कि आज भी विज्ञान, चिकित्सा, गणित और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। भारत के मनीषियों और वैज्ञानिकों का योगदान आने वाले समय में भी अमूल्य रहेगा। भारतीय ज्ञान की यह परंपरा हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है, परंतु यह कैसी बिडम्बना है कि एक तरफ तो हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में होने वाली खोजों का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। मगर दूसरी तरफ कुरीतियों, मिथकों, रूढ़ियों, अंधविश्वासों एवं पाखंडों ने भी हमारे जीवन और समाज में जगह बनाए हुए हैं। हमारे समाज की शिक्षित व अशिक्षित दोनों ही वर्गों की बहुसंख्य आबादी निर्मूल एवं रूढ़िगत मान्यताओं की कट्टर समर्थक है। आज का प्रत्येक शिक्षित मनुष्य वैज्ञानिक खोजों को जानना, समझना चाहता है। वह प्रतिदिन टीवी, समाचार पत्रों एवं जनसंचार के अन्य माध्यमों से नई खबरों को जानने का प्रयास करता है तो दूसरी तरफ यही शिक्षित लोग कुरीतियों, मिथकों, रूढ़ियों, अंधविश्वासों एवं पाखंडों के भी शिकार बन जाते हैं। यहाँ तक कई वैज्ञानिक भी अंधविश्वास एवं कुरीतियों के शिकार बन जाते हैं, जो चकित करता है।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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