Thursday, February 26, 2026
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मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु आलस्य और सबसे बड़ा मित्र है परिश्रम

मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हर समय सोने का मन करना, बिस्तर से ना उठना, किसी काम को करने का मन ना करना, यह सब आलसी होने के ही लक्षण हैं। मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है और सबसे बड़ा मित्र परिश्रम है, जो हमेशा उसके साथ रहता है ।इसलिए वह दुःखी नहीं रहता । कोई भी अपने लिए आलसी होने की और मूर्ख होने की योजना नहीं बनाता । ये सारी चीजें तो तभी होती है, जब आपके पास कोई योजना नहीं होती है। इसलिए लोग क्या कहेंगे, अगर ये सोचकर आप कुछ नहीं कर रहे हो तो आप जीवन की पहली परीक्षा में हार गए। अगर आप सफलता का आनंद उठाना चाहते हैं, तो अपने जीवन में कठिनाइयों का आगमन करवाइए ।
इस दुनिया में सिर्फ अनपढ़ इंसान ही मूर्ख नहीं होता, बल्कि कुछ लोग पढ़ने लिखने के बाद भी मूर्ख कहलाते हैं क्योंकि अच्छी तालीम हासिल करने के बाद भी वे मूर्खों वाला काम ही करते हैं, जबकि इंसान का परिश्रम जैसा दूसरा कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता । कर्म छोड़ कर बैठ जाने से मनुष्य का पतन होता है। मनुष्य को दुख का ऋण कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि यह दुख ही था, जिसने उसे विनम्र बनाया, दूसरों की पीड़ा को समझना सिखाया, ममता का पाठ पढ़ाया। जीवन की महानता और कुछ नहीं केवल सामर्थ्य के साथ विनम्रता का आना ही तो है। जहां समर्थता होती है, वहां कई बार विनम्रता का अभाव ही देखा जाता है….
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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