मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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किसी से बदला लेने में समय व्यर्थ ना करें क्योंकि जो आप को चोट पहुंचाते हैं, वे अपने कर्म का स्वयं सामना करेंगे। बदले की भावना ही बर्बादी की निशानी है ।अगर आपके साथ किसी ने बुरा किया और आपने भी बुरे का बदला बुरा ही किया तो आप दोनों में अंतर ही क्या हुआ ।इसलिए जो जितना साथ चला उसका उतना शुक्रिया। कहते हैं कि जिंदगी में समस्या का सरलता, सहजता से समाधान करना है, तो जीवन में संस्कार, व्यवहार व सम्मान के साथ नम्रता भी अपनाएं। कभी कोई कठिनाई नहीं आएगी।
प्रतिशोध (बदला ) लेने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है । यथा समय पर कभी-कभी उत्तेजना में आने से हम स्वयं की हानि कर लेते हैं । जोश में होश खो कर स्वयं ग्लानि और हानि के अतिरिक्त कुछ भी हासिल नहीं सकेगा । इसलिए प्रतिशोध लेने की बजाय लम्बे समय के लिए भूल जाएँ एवं कुछ सुदृढ़ बनने का प्रयत्न करें । स्थिति अनुकूल होते ही प्रतिशोध की भावना स्वयं ख़त्म हो जायेगी । अगर शिक्षा से पहले संस्कार, व्यापार से पहले व्यवहार, भगवान से पहले माता-पिता को नहीं पहचाना, तो चिराग लेकर ढूंढने पर भी कुछ नहीं होगा। बाकी:- अगर मतलबी लोगों को खो देना एक हार है तो ऐसी हार हमेशा स्वीकार करना ही हितकारी है ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

