नागलोक असोसिएशन पुणे की ओर से महात्मा फुले और विश्वभूषण डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती संपन्न
नटसम्राट निळू फुले नाट्यगृह पुणे मे 26 एप्रिल 2025 को जयंती कार्यक्रम का आयोजन किया गया । विचारमंच पर प्रमुख वक्ता ज्येष्ठ विचारवंत, लेखक डॉ. डी. टी.गायकवाड, नेस वाडिया कॉलेज पुणे के उपप्राचार्य डॉ. पी. एन. चौधरी, नागलोक असोसिएशन तथा कार्यक्रम के अध्यक्ष पुरुषोत्तम गाणार, उपाध्यक्ष वसंतराव बोले, सचिव रवींद्र इंगोले, खजिनदार विजय चौधरी उपस्थित थे ।शुरुवात मे महापुरुषोंके प्रतिमा का पूजन किया गया । बुद्ध वंदना लेने के बाद अतिथियों का स्वागत पी.एस.गाणार इन्होने किया ।
डॉ. पी. एन. चौधरी इन्होने महात्मा फुले की वेष मे संबोधित किया । महात्मा फुले और बाबासाहब को समाज क्रांती करनी थी, समानता लानी थी , गुलामगिरी से लोगों को मुक्त करना था ।
इसी बात के लिए दोनो का ध्येय एक सरिका था , दोनो महापूरुषोने शिक्षण पर जोर दिया । किसान, कामगार के लिए महिलाओ के हक्क और अधिकार के लिए समाजकार्य किया ।
अन्याय के विरुद्ध दोनो महापुरुष प्रस्थापित लोगोसे लढे ।
डॉ.डी.टी.गायकवाड इन्होने व्याख्यान मे कहा की, “बाबासाहेब ने जो संदेश दिया है, वह समाज जागृती का अग्नी हमे जला रखना चाहिए । स्वतंत्रता, समता ,बंधुता और न्याय के लिए हमेशा सतर्क होकर लढना चाहिये ।
भगवान बुद्ध ने समानता के लिए , परिवर्तन के लिये नीव मजबूत किया । उसके उपर महात्मा फुले ने बडा काम करके इमारत बनाई और बाबासाहेब ने संविधान के माध्यम से उसके उपर कलश चढाया ।
महात्मा फुले का कार्य बाबासाहेब ने आगे बढाया ।
हर आदमी को प्रतिष्ठा देने के लिए दिनरात उन्होने कष्ट उठाया, कोलंबिया और केंब्रिज विद्यापीठ मे जो विचारवंत प्रोफेसर मिले उनके साथ मे बाबासाहब ने रहकर शिक्षा प्राप्त की ।
इस वजह से मानव मुक्ती का लढा देने के लिए बाबासाहेब को ऊर्जा मिली । बाबासाहब आंबेडकरजीने हर विषय पर संशोधन करके भारत के विकास मे अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया ।
बाबासाहब केवल संविधान के निर्माता ही नही बल्की आधुनिक भारत के शिल्पकार थे ।बाबासाहब ने बताये हुए मार्ग पर हम सब ने चलना चाहिए ।कार्यक्रम के अध्यक्ष पुरुषोत्तम गानार ने कृतीशिल आराखडा तयार करणे पर जोर दिया ।
हमारा आर्थिक विकास करने के लिए उस दिशा मे काम करना चाहिए ।
इस कार्यक्रम का सूत्रसंचालन डॉ. यशोधरा नितनवरे और आभार प्रदर्शन बुवासाहेब अहिवळे ने किया ।
इस व्याख्यान कार्यक्रम के बाद शाहीर सूर्यवंशीने “फुले भीम गर्जना” यह सांस्कृतिक कार्यक्रम सादर किया ।
इस कार्यक्रम मे उत्साह के साथ भारी संख्या मे बहुजन लोक उपस्थित थे ।

