Thursday, February 26, 2026
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डॉ. आंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन, लेकिन सच्चे आंबेडकरवादियों की अनदेखी ने खड़े किए कई सवाल

संविधान निर्माता की जयंती पर कार्यक्रम तो भव्य रहा, लेकिन विचारों की जगह प्रचार हावी रहा

बालोतरा | 16 अप्रैल 2025 |

मूकनायक जिला ब्यूरो चीफ श्रवण कुमार

राजस्थान के बालोतरा में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 134वीं जयंती पर रैली और समारोह का आयोजन बड़े जोश-ओ-खरोश के साथ किया गया। ‘जय भीम’ के नारों, नीले झंडों और पारंपरिक वेशभूषा में सजी झांकियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक जन आंदोलन जैसा रूप दिया।

लेकिन इस चमक-दमक के बीच कुछ ऐसे सवाल भी उभरे हैं, जो चिंताजनक हैं और जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।


राजनीतिक रंग में रंगा सामाजिक मंच

इस सामाजिक आयोजन की संकल्पना बाबा साहेब की स्मृति और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की थी, लेकिन पूरे कार्यक्रम का संचालन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों के हाथ में दिखाई दिया। मंच पर वक्ताओं ने जहां बाबा साहेब के विचारों को सीमित रूप में प्रस्तुत किया, वहीं विधायक अरुण चौधरी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री की योजनाओं का उल्लेख कर कार्यक्रम को राजनीतिक दिशा दे दी।

यह आयोजन किसी राजनीतिक दल का प्रचार मंच नहीं था, बल्कि एक ऐसा अवसर था जहां समाज के वंचित तबकों की आवाज़ और बाबा साहेब के विचारों को सामने लाना चाहिए था।


सच्चे आंबेडकरवादियों को मंच से दूर रखा गया

इस आयोजन में उन लोगों को मंच से दरकिनार किया गया जो वर्षों से बाबा साहेब के मूल विचारों—जैसे जाति उन्मूलन, शिक्षा, समानता और मानवाधिकार—पर ज़मीनी स्तर पर कार्य कर रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने इस पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि जो बाबा साहेब को दिल से मानते हैं, उन्हें बोलने का मौका तक नहीं दिया गया।


बाबा साहेब के विचारों की सीमित प्रस्तुति

कार्यक्रम में आंबेडकर के क्रांतिकारी विचारों—जैसे बौद्ध धर्म अपनाने का निर्णय, ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष, और सामाजिक समता की लड़ाई—पर लगभग चुप्पी रही। उनकी छवि को सिर्फ ‘संविधान निर्माता’ तक सीमित कर देने का प्रयास किया गया, जो उनके जीवन और संघर्ष की व्यापकता को नज़रअंदाज़ करता है।


मूकनायक की टिप्पणी:

बाबा साहेब डॉ. आंबेडकर सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं। उन्हें किसी दल या संगठन की विचारधारा में समेटना उनके योगदान के साथ अन्याय है। यदि हम सच में उन्हें श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उनके विचारों को सही रूप में समझना और लागू करना होगा।

ऐसे आयोजनों में सच्चे आंबेडकरवादियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, यही बाबा साहेब के प्रति सच्चा सम्मान होगा।

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