मूकनायक/देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हर रिस्ते में एक दूसरे के प्रति आदर, सम्मान और मेल जोल टिकाए रखने का दायरा होता है, फिर वो रिश्ता कितना भी नजदीक का क्यों न हो, लेकिन जरुरत से ज्यादा वक्त देने से सामने वाला इन्सान आपको फालतू (बगैर काम का) समझ लेता है, उसे आपके दोष और आपकी कमजोरी का पता चल जाता है । आप किस तरह के हो, आप जो भी हो, वो उसी की वजह से आपकी पहचान कर लेता है । जिस इंसान को हम ईमानदार और विश्वासनीय समझते हैं, वहीं इंसान जब समय पर साथ छोड़ देता है तो जीवन भर उसे भुलाया नहीं जा सकता और ऐसे हालात में पश्चाताप व हार्दिक पीड़ा के अलावा कुछ भी हासिल नहीं होता। जीवन में दोनों तरह के लोग मिलते हैं, मगर याद वही रहते हैं जिन से आशाएं बंधकर टूट जाती हैं ।
किसी भी रिश्ते को कितनी भी खूबसूरती से क्यों ना बांधा जाए, अगर नज़रों में “इज्जत” और बोलने में “लिहाज” न हो तो वह टूट ही जाता है । इसलिए जीवन में सबसे साफ़ बोलो, सीधा बोलो, सच बोलो और मुंह पर बोलो। जो अपने होंगे, वो समझ जाएंगे और जो नाम के होंगे, वो दूर हो जाएंगे। बाकी कुछ बातें समझने से नहीं, बल्कि खुद पर बीत जाने से समझ में आती हैं और अपने नसीब को कभी बुरा मत कहो, जो अपना होगा, वह हमारे माता पिता से भी ज्यादा हमसे प्यार करेगा, इज्जत भी देगा ।
लेखक
बिरदीचंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

